जनवरी ७, २०१९
लोकसभा मतदानसे पूर्व कांग्रेसने ‘मुस्लिम कार्ड’ खेलते हुए शासनमें आनेपर ‘तीन तलाक’ विधान समाप्त करनेकी बात कही है । देहलीमें पार्टीके अल्पसंख्यक अधिवेशनके समय राहुल गांधीकी उपस्थितिमें सिलचरसे सांसद और ‘ऑल इंडिया महिला कांग्रेस’की अध्यक्षा सुष्मिता देबकी ओरसे यह घोषणा की गई । अल्पसंख्यकोंके मध्य पार्टीका आधार सनक्त करनेके उद्देश्यसे गुरुवार, ७ फरवरीको राष्ट्रीय अधिवेशनका आयोजन किया था । कार्यक्रममें राहुल गांधीने कहा कि पीएम मोदीका मुख ध्यानसे देखें तो आपको उद्विग्नता दिखेगी ।
कांग्रेस अध्यक्षने कहा कि ये देश किसी एक धर्मका नहीं है । यह देश हिन्दुस्तानके प्रत्येक व्यक्तिका है । युद्ध दो विचारधाराओंके मध्यका है । देश अल्पसंख्यकोंने भी देशको बनानेका काम किया है । हमारी विचारधारा कहती है कि देश एक नदी है, जिसमें सभीको स्थान मिलना चाहिए ।
राहुल गांधी कह रहे हैं कि हम ‘तीन तलाक’का विधान समाप्त करेंगें; क्योंकि यह मुस्लिम पुरूषोंको असुरक्षित करता है ! सर्वप्रथम राहुल गांधीजीका धन्यवाद करते हैं, जो उन्होंने बताया कि स्त्री शक्तिको पांवकी जूती समझकर, बच्चे उत्पन्न करनेकी मशीन समझकर, उसे निराश्रित छोडकर तीन तलाक देनेवाला धर्मान्ध ‘पुरूष’ कहलानेका भी अधिकारी है ! सम्भवतः यह कांग्रेसकी संस्कृतिके अनुसार ही है ! राहुल गांधी एक ओर महिला सशक्तिकरणका ढोंग करते हैं, सबरीमालामें महिलाओंके प्रवेशकी बाते करते हैं और दूसरी ओर मुस्लिम महिलाओंके प्रति हो रहे अत्याचार उन्हें दिखाई नहीं देता है; क्योंकि उनके धर्मान्धोंके वोट कम हो जाएंगें ! क्या कांग्रेस इतना भी गिर सकती है ? राहुल गांधी वोटके लिए महिलाओंका जीवन नष्ट करनेकी बात करते हैं, क्या वो यहीं घृणित कृत्य अपनी स्वयंकी भगिनीके साथ होता देख सकते हैं ? सम्भवतः नहीं ! तो ऐसे घृणित वक्तव्य कैसे दे सकते हैं, वह भी बुद्धिहीन धर्मान्धोंका तुष्टिकरणके लिए ! तीन तलाककी आडमें मौलवियोंका हलालाके नामपर वासनाका धन्धा चलता है, यह जानते हुए जो उसका पक्ष लेते हैं, धिक्कार है ऐसे नेताओंपर, जो वोटके लिए इतना गिर सकते हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
Leave a Reply