जनवरी ७, २०१९
केरलके अलप्पुजा जनपदके ‘कोचिन यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग’में उत्तर भारतके छात्रोंकी ओरसे सरस्वती पूजा आयोजनपर अधिकारियोंने रोक लगा दी ! विश्वविद्यालयने इसके लिए धर्मनिरपेक्ष होनेका बहाना बनाया है ।
एक फरवरीको छात्रोंको जारी अधिसूचनामें यह कहा गया कि यह सूचित किया जाता है कि उत्तर भारतके छात्रोंकी ओरसे सरस्वती पूजाके आयोजन करनेके अनुरोधको उपकुलपतिने अस्वीकृत कर दिया है; क्योंकि हमारा परिसर सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष) है और इसके भीतर किसीप्रकारके धार्मिक आयोजन/गतिविधियोंकी आज्ञा नहीं दी जा सकती है !
क्यूसैटसे मान्यता प्राप्त यह महाविद्यालय गत वर्ष २५ जनवरीको छात्रोंके दो गुटोंमें हिंसक झडपके पश्चात अनिश्चित कालके लिए बंद रहा था । ऐसा आरोप था कि एक कार्यक्रमके समय परिसरमें गौमांसके ‘कटलेट्स’ वितरण किए गए थे ।
छात्रोंके एक समूह, जिनमें अधिकतर उत्तर भारतके थे, उन्होंने ये आरोप लगाया कि उन्होंने अपने आपको शाकाहारी बताया था, उसके पश्चात २५ जनवरीको अलप्पुजाके पास परिसरमें उन्हें गौमांस खानेके लिए दिया गया था ।
“छात्रोंको छलसे गौमांस खिलानेवाले, ईद और क्रिसमसको मनानेवाले निधर्मी सरस्वती पूजापर धर्मनिरपेक्ष कैसे हो जाते हैं ?, यह समझसे परेय है । गत दिवसोंमें ही तमिलनाडुके एक विश्वविद्यालयकी प्रदर्शनीमें हिन्दू देवी-देवताओंके निन्दनीय चित्रोंकी प्रदर्शनी लगी थी ! हिन्दू बाहुल्य राष्ट्रमें ऐसा होना दिखाता है कि हिन्दुओंमें धर्माभिमान नहीं है, अन्यथा ऐसे निधर्मियोंको दण्ड अवश्य दिया जाता ! मृतवत हिन्दुओंमें धर्माभिमान जागृत करनेके लिए अब केवल हिन्दू राष्ट्रकी ही आवश्यकता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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