जनवरी ७, २०१९
लोकसभा चुनावमें अब अधिक समय नहीं शेष है, ऐसेमें सभी दल हिन्दुत्वका अपना कार्ड खुलकर खेल रहे हैं । एक ओर जहां बीजेपी और उसको समर्थन करनेवाला संघ बार-बार राम मंदिरका प्रकरण छेड रहे हैं, तो वहीं कांग्रेसी अपने नेताओंकी तुलना अन्य देवी-देवताओंसे कर रहे हैं । इस सन्दर्भमें प्रियंका गांधीको दुर्गा, राहुल गांधीको राम और अब मध्य प्रदेशके मुख्यमन्त्रीको हनुमान और गोभक्त बताया जा रहा है !
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधीके भोपाल भ्रमणके पूर्व नगरकी सडकोंपर फलक (पोस्टर) लगे हैं, जिनमें राहुल गांधी और कमलनाथको हनुमान और गो भक्त बताया गया है । यहां यह बता दें कि नेहरूकी धर्मनिरपेक्षताकी राजनीतिक विरासत रखनेवाले कांग्रेस दलने गोशाला आदि बनानेका वचन दिया था ।
तो अब जब कमलनाथके कार्यकर्ता उन्हें हनुमान भक्त बता ही रहे हैं तो इस बातके भी अनुमान लगाया जा सकता हैं कि ‘दलित हनुमान’को कांग्रेस ‘हाईजैक’ कर रही हो और इसका लाभ लोकसभा चुनावमें उठाना चाहती हो । अब राम भक्त हनुमानसे अधिक रामको और कौन प्यार कर सकता है ? इन कार्यकर्ताओंद्वारा देशके भिन्न-भिन्न स्थानोंपर भगवानसे अपने नेताकी तुलना करना केवल साधारण बात नहीं हो सकती । कार्यकर्ता वही विचार रखता है, जो ऊपर शसे प्रवाहित होते हुए उसतक पहुंचते हैं ।
इन वक्तव्यों, फलक और मंदिर भ्रमणोंसे तो यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस भी अब बीजेपीको उसीके मैदानमें आकर पराजय करनेका प्रयास कर रही है तो यदि चुनावके पास आते ही आपको आपके घरके आस-पास किसी नेताका भगवान रूपी फलक दिखे तो अचम्भित मत होइएगा, समझ जाइएगा कि लोकतन्त्रका सबसे बडा पर्व आपके द्वार आ गया है ।
“विडम्बना है कि इस पर्वपर कोई स्वयंको ईसामसीह अथवा पैगम्बर घोषित नहीं करता है । तामसिक वृत्तिके नेता जो देवताके चरणोंकी धूल भी नहीं, वे स्वयंको देवता व उनके भक्त घोषित करते हैं । भक्त ईश्वरकी आज्ञा अनुरूप कार्य करता है, नेता अपने स्वार्थ व स्वामियोंके अनुरूप तो वे भक्त नहीं अभक्त है; परन्तु भक्तिका स्तर हिन्दुओंने इतना गिरा दिया है कि अब राजनेता भी भक्तत बनने लगे है । वास्तविक भक्ति तो लोकसभा मतदानके पश्चात ही उजागर होगी !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : फर्स्टपोस्ट
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