जनवरी ७, २०१९
महाराष्ट्र शासन शीघ्र ही कौमार्य परीक्षणको दण्डनीय अपराधकी श्रेणीमें सम्मिलित करने जा रहा है । महिलाको कौमार्य परीक्षणके लिए विवश किए जानेपर दण्डनीय कार्यवाहीका सामना करना पडेगा । बुधवार, ६ फरवरीको महाराष्ट्र शासनकी ओरसे इसकी जानकारी दी गई । राज्यमें कुछ समुदाय एक प्रथाका पालन करते हैं, जिसके अन्तर्गत एक नवविवाहित महिलाको यह सिद्ध करना होता है कि वह विवाहसे पूर्व कुंवारी थी ।
गृह राज्य मन्त्री रणजीत पाटिलने बुधवारको इस प्रकरणपर कुछ सामाजिक संगठनोंके प्रतिनिधिमण्डलसे भेंट की । शिवसेनाकी प्रवक्ता नीलम गोर्हे भी प्रतिनिधिमण्डलका भाग थीं । मन्त्रीने बताया, “ विधान और न्यायपालिका विभागके साथ विचार-विमर्शके पश्चात, कौमार्य परीक्षणको यौन उत्पीडनका एक रूप माना जाएगा ।”
कौमार्य परीक्षण प्रथाका पालन महाराष्ट्रमें कंजारभाट समुदायमें किया जाता है । समुदायके कुछ युवाओंने इसके विरुद्घ ऑनलाइन अभियान आरम्भ किया है ।
“विधान बना है ठीक है, क्या यहीं पुरूषोंके लिए बनेगा ? और सबसे बडी बात है कि हम सभ्य समाजको क्यों ऐसी परिस्थितिमें आना पडा कि हमें कुछ परीक्षणकी आवश्यकता पडे ? क्या हम स्वयं इसके उत्तरदायी नहीं ? यदि हिन्दुओंने स्वयं धर्मपालन किया होता और अपने बालकोंसे करवाया होता तो क्यों यह उच्छृंखलता निर्माण होती ! उत्तरदायी हम स्वयं हैं ! और स्वनिरीक्षणकर धर्मपालन करें तब इन सबकी आवश्यकता ही नहीं होगी और जितना बल शासन विधान बनानेमें लगाता है, यदि वहीं धर्मप्रसारमें देता तो इन सबकी आवश्यकता ही नहीं थी !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : टाइम्सनाउ
Leave a Reply