जनवरी ७, २०१९
झारखण्ड उच्च न्यायालयने खूंटीके कोचांगमें ५ आदिवासी लडकियोंके साथ गत वर्ष हुए सामूहिक दुष्कर्म प्रकरणमें स्थानीय गिरिजाघरके पादरी अल्फांसोको गुरुवार, ७ फरवरीको ५० सहस्र रुपयोंके निजी मुचलकेपर सशर्त जमानत दे दी । उच्च न्यायालयके न्यायाधीश एबी सिंहने अपने निर्णयमें कहा कि खूंटी जनपदका पादरी कहीं बाहर नहीं जा सकता है ।
जमानतपर निर्णय देते हुए न्यायालयने कहा कि पादरीको अपना पारपत्र (पासपोत्र) निम्न न्यायालयमें (निचली अदालत) देना होगा । सुनवाईके दिवस उसे उपस्थित रहना होगा और ५० सहस्र रुपयोंका निजी मुचलका भी भरना होगा । यद्यपि, अल्फांसोको अभी कारावासमें ही रहना होगा; क्योंकि इस घटनासे सम्बन्धित एक दूसरे प्रकरणमें उसे मुक्ति नहीं मिली है । अल्फांसोने उच्च न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट करते हुए दावा किया था कि उसपर लगाए गए आरोप निराधार हैं ।
उल्लेखनीय है कि झारखण्डके नक्सलवाद प्रभावित खूंटी जनपदमें पांच आदिवासी युवतियोंके साथ सामूहिक दुष्कर्मके प्रकरणमें पुलिसने गत वर्ष जूनमें पादरी अल्फांसो सहित कई लोगोंको बन्दी बनाया था । इस सम्बन्धमें पुलिसने प्रथम प्राथमिकीमें एक नामांकित और सात अज्ञात आरोपियोंको सम्मिलित किया था । दूसरी प्राथमिकी ‘आरसी ईसाई मिशन’के पादरी अल्फांसो एवं उसके सहयोगियोंके विरुद्घ दुष्कर्मकी घटनाका साक्ष्य छिपाने और आरोपियोंको आश्रय देनेके लिए प्रविष्ट की गई थी ।
“वाह रे हिन्दुस्तानकी न्यायाव्यवस्था ! केरलमें बिशप और अब इस पादरीको दुष्कर्मके आरोपमें कुछ पैसे भरवाकर मुक्त कर दिया जाता है और वृद्ध हिन्दू साधु-सन्यासियोंको कारावासमें सडाया जाता है ! ये किसप्रकारका न्याय है ? हिन्दुओंका धर्म परिवर्तनकर ईसाई बनाया जाता है; परन्तु न्यायालय मौन रहते हैं, यह किसप्रकारका न्याय है ? हिन्दू मन्दिरोंको तोडा जाता है; परन्तु न्यायालय मौन रहते हैं ! संविधानके नामपर हिन्दू विरोधी निर्णय लेनेमें न्यायालय ही मुख्य रहते हैं, ऐसा क्यों ? क्या हिन्दू बाहुल्य इस देशमें हिन्दू होना अपराध है ? न्यायदाता अर्थात निष्पक्ष होकर न्याय देनेवाला; परन्तु जब न्याय ही एकपक्षीय हो और जब न्याय हिन्दुओंके लिए है ही नहीं तो न्यायपालिकाका क्या औचित्य ? हिन्दू हितोंकी हो रही ऐसी विडम्बनाको रोकनेके लिए अब केवल हिन्दू राष्ट्रकी ही आवश्यकता है, जिसमें न्यायदाता धर्मप्रेमी होंगें व तटस्थ रहकर ही न्याय करेंगें !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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