फरवरी १७, २०१९
जम्मू-कश्मीरके पूर्व मुख्यमन्त्री फारूक अब्दुल्लाने आजतकके कार्यक्रम ‘सीधी बात’में पुलवामा आक्रमण और पाकिस्तानकी भूमिसे संचालित आतंकवादपर खुलकर बात की . उन्होंने कहा कि कश्मीरी मुस्लिमोंको प्रताडित करना बंद करें । फारूकने कहा कि मुस्लिमोंको प्रताडित नहीं किया जाना चाहिए । साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तानको पाठ पढानेसे पूर्व हमें अपने देशकी परिस्थितियोंको ठीक करना होगा ।
फारूकने कहा कि कश्मीरकी समस्या राजनीतिक समस्या है, जिसे सुलझानेके लिए शासनको कश्मीरी मुस्लिमोंका हृदय जीतना होगा । उन्होंने केन्द्रके मोदी शासनपर प्रहार करते हुए कहा कि गत ५ वर्षोंमें कट्टरतामें वृद्धि हुई है । ऐसेमें मुस्लिम युवक प्रताडित किए जाएंगे तो क्या कठिनाई उत्पन्न नहीं होंगी । ‘मुस्लिम विक्टिम कार्ड’ खेलते हुए फारूक अब्दुल्लाने कहा कि जम्मू कश्मीरसे कश्मीरी पण्डितोंके पलायनके लिए वहांकी मुस्लिम जनसंख्या उत्तरदायी नहीं है । यह आपदा पाकिस्तानसे आई थी । शासनद्वारा पृथकतावादियोंसे सुरक्षा छीने जानेपर फारूकने कोई भी टिप्पणी करनेसे मना कर दिया ।
उन्होंने कहा कि कश्मीरियोंपर आक्रमण हो रहा है, उनकी क्या चूक है, क्या वो ‘जैश-ए-मोहम्मद’से मिले हुए हैं ? मैं नहीं जानता कि उपाय कैसे निकलेगा ?; परन्तु उपाय तो निकालना होगा ! आज कश्मीरी छात्रोंको देशमें भय लग रहा है, वो वापस लौट रहे हैं !
उन्होंने कहा कि हमें हिन्दुस्तानको एक रखना है तो हिन्दू-मुस्लिम करना बंद करना पडेगा । पत्थरबाजीपर उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि देश सशक्त हो । कट्टरतावाद दोनों ओर है । हमें इस आगको बुझाना होगा ।
मुझे लेकर कहा जाता है कि मैं शासनमें रहता हूं तो कुछ और बोलता हूं और शासनमें नहीं रहनेपर कुछ और बोलता हूं । मैंने कभी ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नहीं कहा, जबकि मेरे घरपर रॉकेट फायर किए गए ! हम लोगोंपर कभी विश्वास नहीं होगा; क्योंकि हम मुसलमान हैं ! मुसलमानपर विश्वास करना आरम्भ कीजिए, नहीं तो ऐसा परिणाम होगा कि ज्ञात नहीं इस देशको ईश्वर भी बचा पाएगा या नहीं; इसलिए अपनी भाषाको परिवर्तित कीजिए !
मैंने सदैव कहा है कि हम भारतीय हैं; परन्तु हमारे साथ अच्छा व्यवहार करना आरम्भ कीजिए । हमपर प्रतिदिन आरोप मत लगाओ । राज्यपाल शासनपर उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी बंद हो गई और ‘जैश-ए-मोहम्मद’ आगे बढ गया ! क्या यह अच्छा है या पत्थरबाज ठीक था ? घाटीमें राज्यपाल शासन असफल रहा है, यहां जनताका शासन होना चाहिए और उसके लिए होनेवाले चुनावमें उचित मशीनका प्रयोग करना चाहिए, चोर मशीनका नहीं !
“मुसलमानोंपर विश्वास कीजिए, विश्वास करके ही तो यह राष्ट्र इतनी विकट परिस्थितिमें पहुंच गया है कि कोई उचित राह भी नहीं दिख रही है । जबतक हिन्दू शान्त होकर रहते हैं, मुसलमानोंको अधिकाधिक मस्जिद खोलने दें, अधिकाधिक संख्या बढाने दें तबतक तो सब ठीक रहता है और जैसे ही हिन्दू बोलनाक्षारम्भ करें तो मुसलमान अल्पसंख्यक होकर बेचारे बन जाते हैं ! क्या मौन रस्हकर इस हिन्दुस्तानको सीरिया या पाकिस्तान बनने दें ? अब मौनका अर्थ केवल आत्महत्या होगा ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
Leave a Reply