कुछ लोग कहते हैं कि अब भारत और पाकिस्तान दोनोंके पास परमाणु बम हैं; ऐसेमें यदि युद्ध हुए तो उसका परिणाम भयावह होगा; अतः युद्ध टालना चाहिए । ऐसे लोगोंको बता दें कि कायर भयके कारण प्रतिदिन मरते हैं और वीर जीवनमें एक बार ही मरता है इसलिए उसे वीरगति प्राप्त हुई ऐसा कहते हैं । हमारे रगोंमें महावीरोंके खून हैं, हम प्रतिदिन आतंकके भयमें नहीं जीना चाहते हैं और न ही प्रतिदिन अपने सैनिक भाईयोंको पाकिस्तान प्रायोजित छद्म युद्धमें धोखेसे मरते हुए या चोटिल होते हुए देखना चाहते हैं, जब इस देशकी जनता युद्ध चाहती है, सेना युद्ध हेतु तत्पर है, तो इस देशके राजनेता जनताके निर्णयका सम्मान क्यों नहीं करना चाहते हैं ? वे अपनी किस छविकी चिन्तामें लगे हुए हैं ?
वस्तुत: इस निधर्मी लोकतंत्रने इस देशकी प्रजाको आतंक और नक्सलके भयमें जीनेकी सीख दी है । इसलिए इस निधर्मी लोकतंत्रका नाश निश्चित ही इसके संरक्षकोंद्वारा इनके अनुचित निर्णयके कारण ही होगा ! और युद्ध तो होगा ही चाहे आज हो या दो वर्ष पश्चात हो; क्योंकि पाकिस्तान बिना युद्धके सुधरनेवाला नहीं है और इस बारका युद्ध निर्णायक होगा ! आर या पार ! देखना यह है कि यह किस योद्धा राजनेताके नेतृत्वमें होता है; क्योंकि इस युद्धको परिणाम देनेवाला एक नूतन युगका इतिहास लिखेगा !
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