फरवरी २१, २०१९
पुलवामा आत्मघाती आक्रमणका क्रोध राजस्थानके ‘जयपुर सेंट्रल कारावास’में भी देखनेको मिला । यहां एक पाकिस्तानी बन्दी शकर उल्लाहकी हत्या कर दी गई । इस हत्याकी सूचना देहली स्थित पाकिस्तानी दूतावासको दे दी गई है ।
वहीं हत्याकी घटनापर अधिक जानकारी देते हुए कारावासके अतिरिक्त कमिश्नर लक्ष्मण गौरने बताया कि दूरदर्शनकी ध्वनिको लेकर शकर उल्लाह और बन्दियोंमें आपसमें विवाद हो गया था, जिसके पश्चात बुधवार, २० फरवरीको वह मृत पाया गया ।
आतंकी शकर उल्लाहके बारेमें आपको बता दें कि उसे लगभग आठ वर्ष पूर्व राजस्थान पुलिसने बन्दी बनाया था । राजस्थान पुलिसको इस बातके पक्के साक्ष्य मिले थे कि उल्लाहके सम्बन्ध आतंकी संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’से थे । जांचके समय उसकी ध्वनिसे आतंकियोंके ‘स्लीपर सेल’का भी रहस्योद्घाटन हुआ था । इसके पश्चात सात वर्षोंतक चली सुनवाईके पश्चात इसे और इसके साथियोंको ३० नवंबर २०१७ को आजीवन कारावासका दण्ड दिया गया था । शकर उल्लाहके साथियोंमें दो अन्य पाकिस्तानी असगर अली और मोहम्मद इकबाली भी सम्मिलित थे । शकर उल्लाह सहित आरोपियोंके सम्बन्ध सीधे पाकिस्तानसे थे । इस बातका रहस्योद्घाटन हुआ कि कारावासमें बैठकर भी ये आतंकी अपने पाकिस्तानी आकाओंसे वार्ता करता था !
“एक आतंकीको इतने लम्बे समयतक कारावासमें रखकर उसे पोषित करना कहांकी बुद्धिमानी है ? उसे उसी समय मृत्युदण्ड क्यों नहीं दिया गया ? कसाब और अफजल गुरु जैसे आतंकियोंको भी कई वर्षोंतक कारावासमें रखा गया था, अफजलको तो भारतीय न्यायाव्यवस्थापर इतना विश्वास था कि वह छूट जाएगा ! क्या यह सब हास्यास्पद नहीं ! इससे ही ज्ञात होता है कि जो न्यायतन्त्र व संविधान आज हमारे पास है, वह प्राचीन हो चुका है, जो आजके परिपेक्षमें किसी कामका नहीं है, अब इसमें परिवर्तनकी आवश्यकता है ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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