महबूबा मुफ्तीका विष वमन, ‘अनुच्छेद-३५ए’से छेडछाडकी तो कश्मीरी कोई और ही ध्वज उठाएंगे !!


फरवरी २५, २०१९

कश्मीरको भूमि और स्थायी निवासपर विशेष स्थान देनेवाले ‘अनुच्छेद ३५-ए’को समाप्त किए जानेकी बातोंको लेकर अब जम्मू-कश्मीरकी पूर्व मुख्यमन्त्री महबूबा मुफ्तीने भी चेतावनी दी है । पीडीपी नेता महबूबा मुफ्तीने कहा है, “आगसे मत खेलो, ‘अनुच्छेद-३५ए’से छेडछाड मत करो, अन्यथा १९४७ से अबतक जो आपने नहीं देखा, वह देखोगे !! यदि ऐसा होता है तो मुझे नहीं ज्ञात कि जम्मू-कश्मीरके लोग तिरंगा उठानेके स्थानपर कौनसा ध्वज उठाएंगे !”

उल्लेखनीय दें कि इससे पूर्व नैशनल कॉन्फ्रेंसके नेता उमर अब्दुल्लाने कहा, “केन्द्र शासन और राज्यपालका उत्तरदायित्व प्रदेशमें चुनाव करवाने भरका है; इसलिए चुनाव ही कराएं, लोगोंको निर्णय लेने दें । नूतन शासन स्वयं ही ‘३५-ए’को सुरक्षित बनानेकी दिशामें कार्य करेगी ।’

अब्दुल्लाने कहा कि जम्मू कश्मीरमें पांच वर्षोंके पश्चात चुनाव करवा पाना कश्मीरकी स्थितिसे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके निबटनेका परीक्षण होगा । अब्दुल्लाने टि्वटरपर कहा, “क्या मोदी शासन पृथकतावादियोंपर और आतंकियोंके सामने घुटने टेकेगी, जो जम्मू कश्मीरमें सदैव ही चुनावोंमें बाधा और देरी पहुंचाते हैं या फिर चुनाव निर्धारित समयपर ही होंगे ? यह समय प्रधानमन्त्री मोदीके लिए गत पांच वर्षोंमें कश्मीरको संभालनेके अनुभवका है ।” अब्दुल्ला उन समाचारोंपर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, जिनमें कहा गया था कि भारतके निर्वाचन आयुक्त इस बातका निर्णय करेंगे कि क्या राज्यमें लोकसभा चुनावोंके साथ राज्यके चुनाव भी कराए जाए ?


जम्मू-कश्मीरमें ‘आर्टिकल-३५ए’की वैधताको चुनौती देनेवाली याचिकापर न्यायखलय इसी सप्ताह सुनवाई करेगा । शीर्ष न्यायालयने २६-२८ फरवरीके मध्य प्रकरणको सुनवाईके लिए सूचीबद्ध किया है । सूत्रोंके अनुसार मोदी शासन इसपर कडा निर्णय ले सकती है ।


‘अनुच्छेद-३५ए’ जम्मू-कश्मीरकी विधानसभाको राज्यके स्थायी नागरिककी परिभाषा निर्धारित करनेका अधिकार देता है । राज्यमें १४ मई १९५४ को इसे लागू किया गया था । यह अनुच्छेद संविधानमें मूल रूपमें नहीं था । प्रदेशके स्थायी नागरिकको कुछ विशेष अधिकार होते हैं ।

जम्मू-कश्मीरमें वहांके मूल निवासियोंके अतिरिक्त देशके किसी दूसरे भागका नागरिक कोई सम्पत्ति नहीं क्रय कर सकता है । इससे वह वहांका नागरिक भी नहीं बन सकता है ।

 

 

“देशके प्रथम प्रधानमन्त्री नेहरुकी दी हुई थोपी हुई विरासत यह देश आजतक भोग रहा है कि कोई भी छोटा-मोटा व्यक्ति पाकिस्तानप्रेमी होनेका खुलेमें प्रमाण देता है और हम कुछ नहीं कर पाते हैं ! महबूबा मुफ्तीजीका राष्ट्रविरुद्ध इतिहास देखकर उनसे ऐसे ही राष्ट्रविरोधी वक्तव्यकी अपेक्षा की जा सकती है; परन्तु अब अपेक्षा तो मोदी शासनसे है कि कैसे राष्ट्रविरोधी तत्त्वोंको मौन करना है ? मुफ्तीका कहना है कि यहांके लोग उन्हें नहीं ज्ञात कि कौनसा ध्वज उठाएंगें तो आपके पास दो ही चुनाव हैं या तो पाकिस्तानका और या फिर आइएसका; क्योंकि भारतका तो ऐसे भी राष्ट्रद्रोहियोंको कभी नहीं भाया है; परन्तु अब यह राष्ट्र राष्ट्रद्रोहियोंकी गीदड भभकीसे भयभीत नहीं है । अब तो कश्मीरको भारतका अंग होते हुए भी उससे पृथक रखनेवाले ‘अनुच्छेद ३५-ए’का अन्त अत्यावश्यक है । उसके पश्चात सभी विरोधी निर्धारित कर सकते हैं कि उन्हें यहीं रहना है अथवा पाकिस्तान जाना है; क्योंकि यह तो ऐसे भी कश्मीरी पण्डितोंकी मूल निवासीय भूमि है, अभी तो रहनेवाले सभी अनाधिकृत ही हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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