पाकिस्तानपर आक्रमण करते समय भी इस देशके राजनेतागण कहते हैं, “हम पाकिस्तानको क्षति नहीं पहुंचाना चाहते हैं, हमें तो मात्र उसके यहांके आतंकी स्थलों एवं आतंकियोंको हानि पहुंचाना है !” जैसे कुएंके जलमें भांग मिल चुकी हो तो उसे पृथक नहीं किया जा सकता है, उसीप्रकार पाकिस्तान आतंकका पर्याय बन चुका है, पाकिस्तानको आतंकसे विभक्त नहीं किया जा सकता है | एक ओर वह शांति हेतु भीख मांगता है और दूसरी ओर हमारी सीमापर सतत गोलीबारी कर रहा है, ऐसे कपटी दुष्टपर विश्वास करना घातक होगा ! १४ फरवरीसे अभी तक ६० सैनिक पाकिस्तान प्रायोजित छद्म युद्धमें हुतात्मा हो चुके हैं | समस्याके समाधान हेतु उसके मूलतक जाना चाहिए और उसके मूलको नष्ट करना चाहिए; सतही उपायसे किसी भी समस्याका समाधान सम्भव नहीं !
Leave a Reply