मार्च ५, २०१९
आतंक निरोधी दलने एक चिकित्सकको बन्दी बनाया है । उसे आतंकवादियोंके सम्पर्कमें होनेके कारण बन्दी बनाया गया । आतंक निरोधक दलको शंका है कि उक्त चिकित्सक जम्मू कश्मीरके आतंकवादियोंके सम्पर्कमें था । उससे गत तीन दिनोंसे पूछताछ जारी है । अधिकारियोंने आरोपीकी पहचान उजागर नहीं की है । उसके सुरक्षा बलोंको छलसे भोजन और जलमें विष देनेके षडयन्त्र करनेका भी संदेह है । इसके अतिरिक्त, उसके मुंब्रा और औरंगाबादसे बन्दी बनाए किए गए नौ संदिग्ध आतंकवादियोंके सम्पर्कमें होनेका भी संदेह है ।
गुप्तचर विभागने गत दिवसोंमें पाकिस्तानी आर्मी इंटेलिजेंस (एमआइ) और ‘इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस’की (आइएसआइ) योजनाके बारेमें चेतावनी जारी की थी, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलोंको दिए जानेवाले भोजनमें विष मिलाया जाने वाला था । एटीएसके अधिकारियोंने मुंब्राके एक अव्यस्क किशोरके साथ मजहर शेख, जुम्मन खुटुपद, सलमान खान, फरहाद अंसारीको बन्दी बनाया था, जबकि मोहम्मद मोहसिन सिराजुल्लाह खान, मोहम्मद तौकीउल्लाह सिराज खान, काजी सरफराज और मशहूद इस्लामको औरंगाबादसे बन्दी बनाया गया था ।
अधिकारियोंने विस्फोटकोंके स्थानपर इनके पाससे हाइड्रोजन पेरोक्साइड, विषैला पाउडर और एसिड अधिकृत किया था ।
ये सभी आरोपित शिक्षित हैं और इस्लामिक स्टेटसे भी इनके सम्बन्ध होनेकी बात सामने आई है ।
“उक्त सभी रासायनिक आक्रमणकर भारतमें अस्थिरता उत्पन्न करना चाहते थे और विशेष बात यह थी कि सभी उच्च शिक्षीत हैं और आए दिन शिक्षित इस्लामप्रेमी ही अधिक पकडे जा रहे हैं । इसका सबसे बडा उदाहरण ‘जेएनयू’ आदि संस्थान है, जो राष्ट्रसे पूर्व इस्लामप्रेमी होनेका दावा करते हैं । ये सभी प्रकरण हमें सोचनेपर विवश कर देते हैं कि जब हम यह निर्धारित नहीं कर सकते हैं कि निकटमें रहनेवाले मजहर शेख, जुम्मन खुटुपद, सलमान खान आदि आतंकी है या साधारण नागरिक तो क्या इस राष्ट्रके लोगोंको यूं ही अपने प्राण संकटमें डालकर इन्हें आश्रय देते रहना चाहिए । क्या सब कुछ जानकर भी हम आत्महत्या नहीं कर रहे हैं ? इसपर सभी विचार करें !
स्रोत : ऑप इण्डिया
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