मार्च ९, २०१९
अभी ‘हिन्दुस्तान युनीलिवर’का विवाद थमा नहीं था कि त्यौहारोंपर विशेष विज्ञापन बनानेवाले ‘सर्फ एक्सेल’ने एक नूतन विवादको जन्म दिया है । कम्पनीने होलीपर एक नूतन विज्ञापन जारी किया है, जिसमें हिन्दुओंकी आस्थाके साथ बडी चतुराईसे खेलनेका प्रयास किया गया है ।
विज्ञापनमें एक हिन्दू बच्ची होलीके दिवस साइकिलके पीछे मुस्लिम बच्चेको बैठाकर गलीमें निकलती हैं, जहां बच्चोंद्वारा रंगोसे भरकर गुब्बारे रखें हुए है । बच्ची पूछती हैं, ‘रंग फेंकना हैं, फेंको’ । तब सभी बच्चे उसपर रंगके गुब्बारे फेंकने लगते हैं । बच्ची गलीमें रंगोंसे भर जाती हैं।
जब बच्चीपर रंग पडना बन्द हो जाता है तो वो साइकिल रोककर छतपर खडे बच्चोंसे पूछती हैं, ‘हो गए रंग समाप्त या और हैं ?’
बच्चोंके मना करते ही एक घरमेंसे श्वेत कुर्ता पजामा पहने मुस्लिम बच्चा बाहर निकलता हैं, जिसे हिन्दू बच्ची अपने साइकिलके पीछे बैठाकर मस्जिद छोडने जाती हैं । बच्चा कहता हैं, “नमाज पढकर आता हूं ।” और उसी समय विज्ञापनमें ध्वनि सुनाई देती हैं कि ‘अपनोंकी सहायता करनेमें दाग लगे तो ‘दाग’ अच्छे हैं ।
“आजकल विज्ञापनकेद्वारा कम्पनियां लव-जिहाद और धर्मनिरपेक्षताका अर्थहीन ताना-बाना हिन्दुओंके मतिभ्रम करके उनपर थोपना चाहती हैं, जिसके अन्तर्गत जानबूझकर हिन्दू युवतीको और मुस्लिम पुरूषको दिखाया जाता है । यदि मुस्लिम लडका होलीके रंगके साथ मस्जिद जाएगा तो कौनसा पहाड टूट पडेगा ?; परन्तु होलीके रंगोंको जानबूझकर दाग कहकर सम्बोधित किया गया; परन्तु यही विज्ञापन कम्पनियां बकरीदके रक्तपर मौन हो जाती हैं ! मुहर्रमपर धर्मान्ध स्वयंको लहुलुहान करते हैं व ईदपर सडके निर्दोष बकरेका रक्त बहाकर सडकें, गलियां सब रक्तसे भर जाती है, तो क्या ‘सर्फ एक्सल’ ऐसा साहस कर सकता है कि उस समय ऐसा विज्ञापन बनाए कि हिन्दू लडका मुस्लिम लडकीको रक्तसे बचाकर मन्दिर ले जाए और कम्पनी कहे कि दागसे बचे तो दाग अच्छे हैं ? हिन्दुओ ! अब भी उठकर इनका विरोध नहीं किया तो ध्यान रहे कि यह दागवाला जिहाद आपके घरतक भी कभी भी पहुंच सकता है और उस जिहादी दागको ‘सर्फ एक्सल’ भी धो नहीं पाएगा; अतः समय रहते जागे और इन विज्ञापन कम्पनियों व इस जिहादका मुखर होकर विरोध करें और वैध मार्गसे इहें न्यायालयोंतक लेकर जाए ताकि सभीको इनके षडयन्त्रका संज्ञान हो !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : इपोस्टमोर्टम
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