आयुर्वेदका शास्त्र वृहद एवं मनुष्यके लिए कल्याणकारी !
आयुर्वेदकी परिभाषा एवं व्याख्यासे ही यह शास्त्र कितना वृहद एवं मनुष्य मात्रके लिए कल्याणकारी है ?, यह ज्ञात होता है । आयुर्वेद विश्वमें विद्यमान वह साहित्य है, जिसके अध्ययनके पश्चात हम योग्य दिशामें आचरण कर सकते हैं । जैसे –
अ. आयुर्वेदयति बोधयति इति आयुर्वेदः।
अर्थात जो शास्त्र (विज्ञान) आयुका (जीवनका) ज्ञान कराता है, उसे आयुर्वेद कहते हैं ।
आ. स्वस्थ व्यक्ति एवं आतुरके (रोगीके) लिए उत्तम मार्ग बतानेवाले विज्ञानको आयुर्वेद कहते हैं ।
इ. अर्थात जिस शास्त्रमें आयु शाखा (आयुका विभाजन), आयु विद्या, आयुसूत्र, आयु ज्ञान, आयु लक्षण (प्राण होनेके संकेत), आयु तन्त्र (शारीरिक रचना व शारीरिक क्रियाएं) – इन सम्पूर्ण विषयोंकी जानकारी मिलती है, वह आयुर्वेद है ।
इतनी व्यापक परिभाषा करनेवाले शास्त्रको हम भूलकर, पाश्चात्य चिकित्सा शास्त्रका इस देशमें अवलम्बन करते हैं, इससे बडी विडम्बना और क्या हो सकती है ? संस्कृत समान इस विद्याको जनमानससे दूर करनेवाले पाश्चात्योंके पुरोधा, राज्यकर्ता यदि नरकवास कर रहे हों तो आश्चर्य न करें !
हिन्दू राष्ट्रमें एलोपैथी नहीं, आयुर्वेद पढाया जाएगा !
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