मार्च ११, २०१९
‘सीआरपीएफ आईजी’ जुल्फिकार हुसैन, कश्मीरके ‘आईजी’ एस.पी. पाणि और ‘लेफ्टिनेंट जनरल’ कंवलजीत सिंह ढिल्लोंने सुरक्षाबलोंकी साझा प्रेस वार्तामें पुलवामा आक्रमणको लेकर बताया है कि जम्मू-कश्मीरके पुलवामामें १४ फरवरीको आतंकी आक्रमणका षडयन्त्र करनेवाले आंतकी मुदासिर अहमदको मार गिराया है । सेनाने बताया है कि वह दक्षिणी कश्मीरके त्राल क्षेत्रमें हुई मुठभेडके समय मारा गया । सेनाने बताया है कि जैशका आतंकी मुदस्सिर ही पुलवामा आक्रमणका मुखिया था । उन्होंने बताया कि पुलवामा आक्रमणके पश्चात सुरक्षाबलोंने १८ आतंकियोंको ढेर किया है ।
कश्मीरके आईजीने कहा कि मारे गए आतंकवादियोंमेंसे एकका अभिज्ञान ‘कोड खालिद’के रूपमें की गई है, जो पाकिस्तानी माना जा रहा है ।
पुलवामाके त्रालके पिंग्लिश क्षेत्रमें रविवार, १० मार्च रात्रि हुई मुठभेडके समय ‘जैश ए-मोहम्मद’का आतंकवादी मुदासिर मारे गए तीन आतंकवादियोंमेंसे एक है । जैशके आतंकवादी खानका अभिज्ञान पुलवामामें सीआरपीएफ दलपर आक्रमण करनेका षडयन्त्र करनेवालेके रूपमें हुई थी । इसमें ‘सीआरपीएफ’के ४० सैनिक हुतात्मा हो गए थे । इसकी जांचमें अब तक एकत्र साक्ष्योंके अनुसार सुरक्षाबलोंने बताया कि २३ वर्षका खान एक इलेक्ट्रिशियन था और स्नातक उत्तीर्ण था । वह पुलवामाका रहनेवाला था और उसने ही आतंकी आक्रमणमें प्रयोग किए गए वाहन और विस्फोटककी व्यवस्था की थी ।
त्रालके मीर मोहल्लामें रहनेवाला खान २०१७ में ‘जैश’से जुडा और बादमें नूर मोहम्मद तन्त्रेने उसको आतंकवादी संगठनमें सम्मिलित कर लिया । नूर त्रालीके बारेमें माना जाता है कि उसने घाटीमें आतंकी संगठनोंको पुनर्जीवित करनेमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । त्रालीके २०१७ में मारे जानेके पश्चात खान अपने घरसे १४ जनवरी, २०१८को लापता हो गया और वह तबसे आतंकवादीके रूपमें सक्रिय था ।
अधिकारियोंने बताया कि पुलवामामें विस्फोटकसे भरे वाहनसे ‘सीआरपीएफ’की बसमें टक्कर मारनेवाला आत्मघाती आक्रान्ता आदिल अहमद डार निरतर खानके सम्पर्कमें था । खान प्रशिक्षित होनेके पश्चात एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानसे (आईटीआई) एक वर्षका डिप्लोमा करके इलेक्ट्रिशियन बना था । वह यहांके एक श्रमिकका सबसे बडा पुत्र था । ऐसा माना जाता है कि फरवरी २०१८ में सुंजावानके सेनाके शिविरपर हुए आतंकी आक्रमणमें भी वह सम्मिलित था । इस आक्रमणमें छह जवान हुतात्मा हो गए थे और एक नागरिककी मृत्यु हो गई थी ।
सीआरपीएफके शिविरपर लेथोपोरामें जनवरी, २०१८ में हुए आक्रमणके पश्चात खानकी भूमिका सुरक्षाबलोंकी दृष्टिमें आई थी । इसमें सीआरपीएफके पांच सैनिक हुतात्मा हो गए थे । पुलवामा आक्रमणकी जांच कर रही राष्ट्रीय जांच विभागने (एनआईए) खानके घरपर २७ फरवरीको छापा मारा था ।
पुलवामा आतंकी आक्रमणमें प्रयोग किए गए ‘मारूती इको मिनिवान’को ‘जैश’के लिए काम करनेवाले एक व्यक्तिने १० दिवस पूर्व क्रय किया था । इस व्यक्तिका अभिज्ञान सज्जाद भट्टके रूपमें हुआ है । यह दक्षिणी कश्मीरके बिजबेहराका रहनेवाला है और आक्रमणके पश्चातसे भागा हुआ है । ऐसा माना जा रहा है कि वह अब सक्रिय आतंकवादी बन गया है ।
“प्रथम ये आतंकी शिक्षित होकर प्रबुद्ध इस्लामी बनते हैं, तदोपरान्त आतंकी संगठनमें सम्मिलित हो जाते हैं । जब शिक्षीतकर आतंकी ही बनना है तो ऐसी साक्षरताका क्या लाभ है ? प्रथम तो हम इनकी शिक्षामें अपना धन व्यर्थ करते हैं और उसके इनसे बचनेके लिए अपना धन व सैनिकोंके प्राण व्यर्थ करते हैं । स्वतन्त्रताके पश्चातसे यही होता आया है और राज्यकर्ता इसका कोई समाधान नहीं निकाल पाए है ! निकाले भी कैसे ? वोटक्षव कुर्सीकी चिन्तामें स्वयंको भूल बैठते हैं तो देश कहांसे आएगा ! हमारे सैनिक अवश्य ही वीर होते हैं; परन्तु यदि राज्यकर्ता समाधान निकालेंगें तो जिन सैनिकोंके अमूल्य प्राणोंको हम खो देते हैं, उन्हें नहीं खोएंगें; परन्तु समाधानके लिए राज्यकर्ताओंको तुष्टिकरण छोडना पडेगा !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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