मार्च १२, २०१९
पाकिस्तानके आश्रित आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’को लेकर पाकिस्तानी सेना और शासन कैसे असत्य वाचन करते हैं, यह बात ‘आजतक’की ‘एसआईटी’ने की है । ‘जैश’ एक प्रतिबन्धित आतंकवादी संगठन है; परन्तु इसी ‘जैश’का पाकिस्तानसे अपना समाचार-पत्र निकलता है और उसीमें ‘जैश’को अनुदान देनेके लिए विज्ञपन भी प्रकाशित होते हैं और ये धन पाकिस्तानी बैंकके खातेमें जाता है । आजतकके जांच दलने भी जैशको चंदा देनेके नामपर फोन घुमा दिया ।
रंग परिवर्तित करना किसे कहते हैं ?, यह समझना हो तो पहले पाकिस्तानको समझिए, जिसने बालाकोटमें भारतीय वायुसेनाकी स्ट्राइकके पश्चात कहा कि जैशका मुखिया मसूद अजहर पाकिस्तानमें हैं । पाकिस्तानके विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशीने कहा कि मसूद पाकिस्तानमें है। ज्ञात हुआ है कि वो रूग्ण है, चल-फिर भी नहीं सकता और अन्तर्राष्ट्रीय दबावको देखते हुए केवल एक सप्ताहमें अपनी ही धुरीपर १८० डिग्री घूम गया अर्थात आतंकियोंको बचानेके लिए पाकिस्तान किसी भी सीमातक जा सकता है ।
पेशावरसे प्रकाशित होनेवाला एक साप्ताहिक उर्दू समाचार पत्र है ‘अल-कलम’, जिसे ‘जैश’का मुखिया मसूद अजहरका मुखपत्र माना जाता है और इसीकेद्वारा आतंकी संगठन जैश अपने कुकर्म करनेके लिए आर्थिक सहायता एकत्र करता है । जैशका ये साप्ताहिक समाचार-पत्र ऑनलाइन भी उपलब्ध है, जिसमें अधिकतर भारत और जम्मू-कश्मीरसे सम्बन्धित समाचार रहते हैं । आतंकियोंको ‘मुजाहिदीन’ कहकर उनकी प्रशंसा की जाती है ।
इसे, तल्हा सैफ नामक व्यक्ति चलाता है, जो मसूद अजहरका निकटवर्ती है । ये वही तल्हा है, जिसका वर्णन भारतने पुलवामा आक्रमणके प्रकरणमें पाकिस्तानको सौंपे निन्दापत्रमें (डोजियरमें) भी किया है । जब ‘आजतक’ने जैशके इसके विगत सम्पादकको देखा तो जैशका ये पुराना विज्ञापन देखा, जो इस बातका साक्ष्य है कि जैशको केवल पाकिस्तानसे ही नहीं वरन विश्वभरमें धनी उद्योगपतियोंसे भी धन आता है और इसीकेद्वारा वो पाकिस्तानी युवाओंको उत्तम जीवनका लालच देकर आतंकी बनाते हैं !!
जब विज्ञापनमें दिए चलभाष क्रमांकको देखा तो ज्ञात हचा कि जिस मोहम्मद रियाजका नाम प्रविष्ट है, वो अभी भी जैशके लिए धन एकत्र कर रहा है । जांच दलके एक सदस्यने इसकी जांच करनेके लिए जैसे ही दुबईमें एक पाकिस्तानी व्यापारीका बनावटी रूप बनाया । चलभाषपर रियाजने ना केवल अपनी पहचान स्वीकार की, वरन उसने लाहौरमें जैशके एक और आतंकीका नाम सुझाया, जिसे धन दिया जाना था ।
पत्रकार – अस्सलाम वालेकुम, मैं जब्बार बोल रहा हूं ।
मो. रियाज – वालेकुम अस्सलाम ।
पत्रकार- क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं ?
मो. रियाज – मोहम्मद रियाज बोल रहा हूं ।
पत्रकार- आपका विज्ञापन मैंने देखा था ।
मो. रियाज – अच्छा, मैं तो कराचीमें रहता हूं, जो हमारे मित्र होते हैं वहांके (लाहौर) । इसमें पंजाबका क्रमांक होगा और मरकजी क्रमांक लिखा होगा, जहां आपने मेरा चलभाष क्रमांक देखा है ।
पत्रकार- आपका जो समाचारपत्र निकलता है, उसमेंसे मैंने देखा है ।
मो. रियाज – ये मेरा बलूचिस्तानका क्रमांक लिखा है । यदि आप लाहौरमें हैं तो आपको पंजाबवाले क्रमांकपर बात करनी चाहिए या मरकजी क्रमांकपर । मैं आपको लिखवाता हूं, लिख लें ।
पत्रकार- ये किन साहबका क्रमांक है, रियाज साहब ।
मो. रियाज – ये अब्दुल्ला नदीम साहबका क्रमांक है ।
कुल मिलाकर इससे ये स्पष्ट हो गया कि जैशकी पकड पाकिस्तानके किसी एक भागमें नहीं है, वरन पूरे पाकिस्तानमें फैले हैं और पाकिस्तानी शासनकी नाकके नीचे आतंककी दुकान चलानेके लिए धन भी एकत्र कर रहे हैं; परन्तु शासन नेत्र मूंदे हैं !
पत्रकार- हां, जैशका खाता क्रमांक लिखवा दीजिए ।
मो. रियाज – जैशका कोई अपना खाता क्रमांक नहीं है । मैं आपको अपना लिखवा सकता हूं, यदि आप कुछ पैसे देना चाहें । मैं उन्हें दे दूंगा ।
पत्रकार- ये बैंक कौनसी है जनाब ?
मो. रियाज – मोहम्मद रियाजके नामसे है । बैंक इस्लामिकमें, एआईए शाखा ।
पत्रकार- और नगर कौनसा होगा ?
मो. रियाज – कराची. मोहम्मद रियाजके नामसे, १००२००****
पत्रकार- अभी मैं जो आपको सहायता दूंगा, आपके खातेमें जो धन डालूंगा तो मेरे लिए कोई कठिनाई तो नहीं होगी; क्योंकि पाकिस्तानमें ‘जैश’पर जो प्रतिबन्ध लगाया जा रहा हैं, इमरान खानका जो शासन है, उसकी ओरसे ।
मो. रियाज – कोई कठिनाई नहीं है । ये तो मेरा निजी खाता है, किसीको कोई समाचार नहीं मिलेगा ।
पत्रकार- तो आप ये पैसे पहुंचा देंगे न जैशको ?
मो. रियाज – जी ।
स्पष्ट है इतनी वार्ता पर्याप्त है ये सिद्ध करनेके लिए कि पाकिस्तान आतंकीके लिए जन्नत है । वो यहां जैसे चाहे रहते हैं । जहांसे चाहे धन मंगवाते हैं और पाकिस्तान उन्हीं धनसे इन आतंकियोंको आश्रय देता है और अशांतिके लिए प्रयोग करता है ।
स्रोत : आजतक
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