मार्च १५, २०१९
वह स्वयंका नाम आशुतोष बताता था, जबकि वह आशुतोष नहीं, वरन रिजवान था । हिन्दू नाम रखकर घूमनेवाले रिजवानके लक्ष्यपर हिन्दू लडकियां थी, जिन्हें वह लव-जिहादके चंगुलमें फंसाना चाहता था । जबतक आशुतोषके कुकृत्य सामने आते, तबतक वह अपने षडयन्त्रमें सफल हो चुका था । आशुतोष बने रिजवानके षडयन्त्रमें फंसकर एक युवतीका जुवन नष्ट हो चुका था ।
प्रकरण उत्तर प्रदेशके देवरियाका है, जहां मुस्लिम युवकने हिन्दू बनकर आशुतोष नाम रखा तथा हिन्दू युवतीको लव जिहादमें फंसाकर एक हिन्दू युवतीसे विवाह कर लिया और उसके साथ पतिके रूपमें रहने लगा; परन्तु एक दिवस युवतीके हाथ युवकका आधार कार्ड लग गया, जिसपर आशुतोषके स्थानपर मुस्लिम युवक रिजवानके रूपमें हुई । पीडित युवतीने इस सम्बन्धमें पुलिस थानेमें परिवाद प्रविष्ट कराई है । देवरिया पुलिसने धोखाधडीके अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्टकर जांच आरम्भ कर दी है ।
देवरियाके बरहज थानेके प्रभारी (एसएचओ) वीर बहादुर यादवने बताया कि मूल पहचान छिपाकर डेढ माहसे कपरवारके पश्चिम टोलामें युवतीके साथ किराएके घरमें रह रहे युवक रिजवानपर धोखाधडीका अभियोग प्रविष्ट किया गया है । पुलिसके अनुसार युवकका वास्तविक नाम रिजवान है, जबकि वह आशुतोष रायके नामके फर्जी पहचान पत्रपर रहा था । एसएचओने बताया कि देवरियाके लारके रोपन छपराका निवासी रिजवान औषधियोंका यापारी है ।
बताया गया है कि कुशीनगरके रामकोला क्षेत्रमें वह औषधियां उपलब्ध करता था । इसी मध्य वह एक युवतीके सम्पर्कमें आ गया । आरोप है कि रिजवान युवतीको अपने बहलाकर बरहजके कपरवार गांवके पश्चिम टोलेमें रह रहा था । उसने युवतीको अपनी पहचान आशुतोष राय बताकर एक मंदिरमें विवाह किया था, तदोपरान्त एक दिवस युवतीके हाथ युवकका आधार कार्ड लग गया, जिसमें उसका नाम रिजवान लिखा हुआ था । इसके पश्चात युवतीने पुलिसमें परिवाद प्रविष्ट कराई है ।
“संस्कारहीनता नियमोंका उल्लंघन व उच्छृंखलताको जन्म देती है । आजके तथाकथित प्रेम रूपी उच्छृंखलताने जबसे युवाओंको मतिभ्रमित किया है, तबसे लवजिहादके प्रकरण और अधिक बढे हैं । यदि युवती अपने परिवारकी सम्मतिसे विवाह करती तो सम्भवतः एक धर्मान्ध जिहादी उसका जीवन नष्ट न करता; परन्तु स्वतन्त्र जीवन जीनेके नामपर आज युवतियां जिहादकी भेंट चढ रही हैं । जिहादियोंका एकमात्र लक्ष्य हिन्दू युवतियोंका जीवन नष्ट करना है, यह उन्हें समझ नहीं आता है ! इसके लिए अब हिन्दुओंको व विशेषतया युवतियोंको जागृत होना पडेगा ! स्मरण रखें कि संस्कारित समाज ही आसुरिक वृत्तिको रोक सकता है; अतः संस्कारोंको अपनाएं व धर्मका पालन करें, इसमें ही सबका कल्याण निहित है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : सुदर्शन न्यूज
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