धर्मान्ध चाहे अशिक्षित हों या शिक्षित हों; किन्तु उनकी धर्मान्धता नहीं जाती है; क्योंकि उन्हें अपने तथाकथित धर्मकी घुट्टी बाल्यकालसे ही पिलाई जाती है, वहीं हिन्दुओंको धर्म शिक्षण न मिलनेके कारण आजका उच्च शिक्षित हिन्दू तो स्वयंको हिन्दू कहनेमें भी लज्जा अनुभव करता है, वह स्वयंको गर्वसे धर्मनिरपेक्ष कहता है ! यह है हिन्दुओं और मुसलमानोंके धर्मप्रेममें भेद !
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