मार्च २५, २०१९
लोकसभा चुनावका शंखनाद हो चुका है । ग्राम, मण्डलों और गलियोंमें राजनीति जारी है, लोग अपने-अपने दलों और नेताओंके गुणगानकर रहे हैं । इसी मध्य सजेती थानाक्षेत्रके दौलतपुरमें एक सन्तको मुख्यमत्री योगीकी प्रसंसा करना भारी पड गया ।
गांवके गुण्डे नूर और अली अपने समर्थकोंके साथ मंदिरमें आ गए और पूजाकर रहे साधूको पीटा । मरा समझकर वे उसे फेंककर भाग गए । ग्रामीणोंने पुलिसको सूचना दी ।
दौलतपुर गांवके बाहर हनुमान मंदिरमें गत बीस वर्षोंसे मनोज बाबा पूजा-पाठ करते हैं । वह कुम्भ स्नानके पश्चात मंदिर लौटे । सन्ध्याको ग्रामीणोंके साथ चौपाल लगाकर वहांकी कथाएं सुनानेके साथ मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथकी प्रसंसा करते थे ।
इसका समाचार जब समाजवादी दलसे जुडे नूर व उसके भाई अलीको हुआ तो उन्होंने मनोज बाबाको मुख्यमन्त्री व भाजपाका प्रचार करनेसे रोका; परन्तु वह नहीं माना । देर सन्ध्या दोनों भाई नशेमें धूत होकर अपने अन्य साथियोंके संग मंदिरमें आ धमके, मनोज बाबाको मन्दिरसे खींचकर लाए और उन्हें भगा-भगाकर पीटा !! मृत समझकर आरोपी उन्हें मंदिरके पीछे फेंककर भाग गए ।
रामबाबू निषादने बताया कि प्रातःकाल वह मन्दिर गए तो बाबा पीडासे कराह रहे थे । हमनें पुलिसको सूचना देनेके पश्चात उन्हे चिकित्सालयमें प्रविष्ट कराया, जिसके चलते नूर और अलीने हमें भी मारनेकी योजना बनाई । चिकित्सालयसे घर लौटते समय उन्होंने हमारी भी पिटाई की ।
पुलिसने मनोज बाबा और रामबाबूकी याचिकापर दोनों भाईयोंके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट कर लिया है । मनोज बाबाने बताया कि दोनों भाईयोंका वर्चस्व है और कुछ दिन पूर्व उन्होंने घोषित किया था कि गांवमें जो भाजपाका प्रचार करेगा, उसे छोडा नहीं जाएगा ।
दौलतपुर गांवमें मुस्लिमके साथ निषाद समुदायके लोग रहते हैं । २०१४ और २०१७के चुनावमें यहांके मतदाताओंने भाजपाके पक्षमें वोट किया था, जिस कारण नूर और अली ग्रामीणोंसे विशेषत: क्रोधित थे । दोनों भाई समाजवादी दलके समर्थक बताए जा रहे हैं ।
मनोज बाबाने कहा कि उन्हें राजनीतिसे कोई लेना-देना नहीं है । वह तो कुम्भमें पूर्व नियोजनोंपर ग्रामीणोंको जानकारीसे अवगत करा रहे थे और इसीके कारण दोनों भाई हमसे वैरमें रहने लगे ।
सजेती थाना प्रभारी अमरेंद्र बहादुर सिंहने बताया कि याचिकाके आधारपर ‘एनसीआर’ प्रविष्ट की गई है । आरोपियों नूर बख्श व उसके भाई नूर अलीकी खोजकी जा रही है ।
“क्या धर्मान्ध नूर बख्श और अलीने राजनीतिक वैर-विरोधके चलते साधुको पीटा है ? सम्भवतः नहीं ! यह तो उस इस्लामिक विषका परिणाम है, जो उनके भीतर लम्बे समयसे उपज रहा है, हां इतना अवश्य है कि इसप्रकारके सभी धर्मान्ध जिहादी सपा या बसपामें ही आश्रय पाते हैं; इसलिए इन प्रकरणको राजनीतिक कहकर दबा दिया जाता है । यदि केवल राजनीतिक विरोध ही इसका कारण था तो गांवके अन्य लोग भी इनका लक्ष्य बनते ! योगी शासन इन दोनों धर्मान्धोंपर कडीसे कडी कार्यवाहीकर कठोर दण्ड दें, यह सभी राष्ट्रनिष्ठोंकी मांग है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज रेडबुल
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