मार्च २९, २०१९
पृथकतावादी कश्मीरी नेता शब्बीर अहमद शाहपर प्रवर्तन निदेशालयने नियन्त्रण कसा है । ईडीने शुक्रवार, २९ मार्चको आतंकियोंको धन उपलब्ध करवानेके प्रकरणमें शब्बीर अहमद शाहकी दो कोटि रुपयोंसे अधिककी संपत्तियोंको अधिकृत कर लिया । पृथकतावादी नेता शाहकी ये सम्पत्तियां उनकी पत्नी और पुत्रियोंके नामपर थीं । ‘ईडी’ने शब्बीर शाहकी इफंदी बाग, रावलपोरा और श्रीनगर स्थित सम्पत्तियोंको अधिकृत किया है । ये सभी सम्पत्तियां ‘मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’के अन्तर्गत अधिकृत की गई हैं । वर्ष १९९९ में इनकी सम्त्तियोंका मूल्य लगभग २५ लाख रुपये था ।
प्रवर्तन निदेशालयके अनुसार, पृथकतावादी नेता शब्बीर अहमद शाह अपने साथी मोहम्मदके साथ अवैध गतिविधियां करनेमें सम्मिलित रहा है । ईडीने दावा किया है कि शब्बीर अहमद शाह आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’के सक्रीय कार्यकर्ता असलम वानीकेद्वारा पाकिस्तान स्थित समर्थकोंकेद्वारा श्रीनगरमें हवाला संचालकोंसे भेजे गए पैसेको एकत्र करता है ।
शब्बीर शाहने स्वीकार किया कि उसके पास आयका कोई स्रोत नहीं है । साथ ही वह अपने व्ययके लिए पैसेके किसी भी वैध स्रोतके बारेमें भी बता नहीं पाया । जांचसे यह भी ज्ञात हुआ कि शब्बीर अहमद शाह पाकिस्तानकी भूमिसे चलनेवाले आतंकी संगठन ‘जमात-उद-दावा’के सरगना हाफिज सईदके सम्पर्कमें था ।
जांच विभागके अनुसार, उन्होंने पाया कि शब्बीर अहमद शाहको जम्मू-कश्मीरमें अलगाववादी गतिविधियोंको करनेके लिए धन मिलता था और संदिग्ध लेनदेनके माध्यमसे इन सम्पत्तियोंको क्रय किया । जिन सम्पत्तियोंको अधिकृत किया गया है, वो श्रीनगरके धनी क्षेत्र इंफदी बाग और रावलपोरामें स्थित हैं । ये सम्पत्तियां शब्बीर अहमद शाहकी पत्नी और पुत्रियोंके नामपर है ।
ईडीने कहा, “यह दिखाया गया था कि यह सम्पत्ति २००५ में उसकी भाभीद्वारा उसकी पत्नी और पुत्रियोंको उपहारमें दी गई थी, जो १९९९ में उसके ससुरद्वारा उनके नामपर क्रय की गई थी । यद्यपि, बार-बार अवसर दिए जानेके पश्चात उनके ससुर और भाभी इस सम्पत्ति क्रयके लिए पैसेका स्रोत बता पानेमें असफल रहे हैं !”
“एक-एककर अनेक पृथकतावादी व आतंक समर्थ संगठन पकडे जा रहे हैं, जिन्हें पहले आश्रय दिया जा रहा था, मोदी शासन इसके लिए अभिनन्दनका पात्र है और एक बात भी सिद्ध कर रहा है कि इस देशको अभी मोदी शासनको कुछ और समय देना चाहिए । हिन्दुओ ! सावधानीपूर्वक आनेवाले मतदानमें अपने मतका चपयोग करे और ऐसा करते समय भावना राष्ट्रकी हो न कि कोई सब्सिडी या स्वार्थकी !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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