आटेका पलथन रोटी बनानेके पश्चात पुनः आटेके पात्र, टिन, डब्बा इत्यादिमें डालनेसे भण्डार होता है अशुद्ध !


कुछ स्त्रियां आटेका  पलथन (रोटी बनाते समय उपयोगमें लानेवाला सूखा आटा) रोटी बनानेके पश्चात उसे पुनः आटेके पात्र, टिन, डब्बा इत्यादिमें डाल देती हैं इससे भण्डार अशुद्ध हो जाता है ! भण्डारके अशुद्ध होनेसे घरकी समृद्धि अवरुद्ध होती है; इसलिए रोटी बनानेके पश्चात बचा हुआ पलथन एक भिन्न पात्रमें (डब्बा या टिफिन बॉक्समें) रखें ! ध्यान रखें आपका भण्डार जितना शुद्ध, स्वच्छ और पवित्र होगा आपके घरमें उतनी ही समृद्धि रहेगी ! वैसे ही आजकल अनेक स्त्रियां बाएं हाथसे भोजन बनाती हैं, बाएं हाथसे बना भोजन अपवित्र माना गया है अनेक कर्मकाण्डी सन्त तो ऐसे हाथसे बने भोजनको ग्रहण भी नहीं करते हैं इसलिए भोजन दाहिने हाथसे बनाना और परोसना चाहिए | इससे भोजनकी सात्त्विक भी बनी रहती है | यदि आपकी पुत्री या पुत्र बाएं हाथसे ऐसी क्रिया आरम्भ करें तो उन्हें टोकें और उन्हें स्वयंसूचना लेनेके लिए कहें ! रात्रिमें सोनेसे पूर्व जब निद्रा आने लगे तो अपने अंतर्मनको योग्य कृति या विचारके लिए दस या पंद्रह बार बतानेकी पद्धतिको स्वयंसूचना देना कहते हैं !



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