अप्रैल १, २०१९
केन्द्रकी सुकन्या समृद्धि योजनाको २०० से अधिक इस्लामिक जानकारोंने (मुफ्ती) ‘गैर-इस्लामिक’ घोषित किया है । इस योजनाके अन्तर्गत बैंकमें बालिकाओंके नामपर उनके माता-पिताद्वारा खाता खुलवाया जाता है । शरियाके अनुसार यह योजना एक गैर-इस्लामिक योजना है । ‘जमीयत उलेमा-ए-हिंद’के मीडिया प्रभारी अजिमुल्लाह सिद्दीकीके अनुसार, सुकन्या समृद्धि योजना ब्याजपर आधारित है; इसलिए यह योजना गैर-इस्लामी है ।
मोदी शासनने २०१५ में ‘बेटी बचाओ बेटी पढाओं’ अभियानके अन्तर्गत यह योजना आरम्भ की थी । सुकन्या समृद्धि योजना केन्द्र शासनकी विशेष योजना है । इस योजनाके अन्तर्गत १० वर्ष तककी बच्चियोंका बैंक खाता मात्र २५० रुपयोंमें किसी पोस्ट ऑफिस या कमर्शियल ब्रांचकी अधिकृत शाखामें उनके माता-पिताद्वारा खुलवाया जाता है । इस योजनाके अन्तर्गत खुलवाए गए खातोंमें एकत्र राशिपर ८.६% वार्षिक ब्याज (वर्तमान दर) दिया जाता है । शरियाके अनुसार, इस योजनाके अन्तर्गत मिलनेवाला ब्याज ही इसे गैर-इस्लामी बनाता है ।
‘जमीयत उलेमा ए हिन्द’के मीडिया प्रभारी अजीमुल्लाह सिद्दीकीने बताया कि इस सप्ताहके आरम्भमें संगठनद्वारा आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलनमें बच्चियोंके लिए चलाई जा रही छोटी बचत योजनापर एक प्रस्ताव पारित किया गया । ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’के कमाल फारुकीने कहा कि बैंकके पास पूंजीके माध्यमसे ब्याज अर्जित करना ‘गैर-इस्लामी’ है ।
“सुविधानुसार परिभाषा निर्धारित करना ही शरीयत है । आए दिन ऐसे-ऐसे निराधार तर्क आते हैं, जिसपर विश्वास करना कठिन है; अन्यथा कन्याओंके लिए ब्याजकी योजना धर्मविरुद्ध कैसे हो सकती है ? इस्लामिक लोगोंने अपनी कुरीतियोंको दूर करने हेतु फतवा लाना चाहिए; परन्तु निराधार बातोंपर फतवा लाना यह प्रतिबन्धित होना चाहिए; क्योंकि यह लोकतन्त्र है और लोकतन्त्रमें भिन्न विधानका कोई अर्थ नहीं है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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