मन्दिर शासकीयकरणके दुष्परिणाम, माता वैष्‍णो देवीकी आरती करना हुआ दोगुणा महंगा, देने होंगें २००० रूपये !!


अप्रैल ३, २०१९

वैष्णो देवीकी प्राचीन गुफाके प्रांगणमें प्रातःकाल और सन्ध्यामें होनेवाली दिव्य आरतीमें सम्मिलित होनेके लिए अब श्रद्धालुओंको दोगुणा मूल्य देना पडेगा । पहले श्रद्धालु इस अटका आरतीमें सम्मिलित होनेके लिए प्रति श्रद्धालु १००० रुपये देते थे; परन्तु अब श्रद्धालुओंको एक अप्रैलसे २००० रुपये प्रति श्रद्धालु भुगतान करना पडेगा, जिसकी घोषणा ‘श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड’ने कर दी है ।

इसके साथ ही मां वैष्णो देवीकी पवित्र पिंडियोंके समक्ष होनेवाली दिव्य आरतीका शुल्‍क भी ‘श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड’ने बढा दिया है । आरतीके मूल्य बढानेपर श्रद्धालुओंने विरोध प्रकट किया । इस मध्य देहलीसे आए के के कुमारने कहा, “हमने कल भी और आज भी आरती की; परन्तु मूल्य बढा दिए गए हैं, ये अनुचित है । समितिको इसपर सोचना चाहिए ।” वहीं कानपुरके विकास मल्‍होत्राने कहा कि एकदम से दोगुणा मूल्य वृद्धि उचित नहीं है । पहलेसे ही महंगाई है, ये धर्मका स्थान है, ऐसा नही होना चाहिए ।

पंच धार वैष्णो देवी आए सोनू ठाकुरने कहा, “कलसे हमें ज्ञात हुआ है कि आरतीके मूल्य बढा दिए हैं । हम कल सीईओ समितिसे मिलेंगे और इसपर बात करेंगें । ऐसा नहीं होगा । हम विरोध करेंगें; परन्तु प्रथम उनसे मिलकर बात करेंगें और समाधान निकालनेका प्रयास करेंगें ।”

 

“मुगलोंद्वारा हिन्दुओंसे जजिया कर लिया जाता था, जब उन्हें अपने तीर्थस्थलोंमें जाना होता था और आज मन्दिरोंमें इसप्रकारके कृत्य होने लगे हैं और ये केवल मन्दिर शासकीयकरणके दुष्टपरिणाम है ! तीर्थका अर्थ होता था, धर्मस्थल जहां कुछ दिवस तप करना होता था, जिससे वह दैवीय चैतय आपके जीवनको परिवर्तित कर सके; परन्तु सुविधा देनेके नामपर धर्महीन हिन्दुओंद्वारा ही अपने तीर्थस्थलोंको विकृत किया जा रहा है ! आज ऐसी स्थिति है कि आधुनीकरण और सुविधाओंके नामपर तीर्थोंको विश्रामालयोंकी भांति दिखानेका प्रयास किया जा रहा है ! सुविधा देना अनुचित नहीं है; परन्तु मूल सुविधाएं पर्याप्त हैं और उसके लिए क्या धनकी ऐसी न्यूनता हो गई शासनके पास कि आरतीमें खडे रहनेका मूल्य २००० कर दें !! जब हजके लिए हवाई यात्रामें कटौती और अन्य निशुल्क सुविधाएं दी जाती हैं, क्या तब शासनके पास धनकी न्यूनता नहीं होती ! यह अवश्य ही निन्दनीय है और तीर्थस्थलोंका तथाकथित अति आधुनीकरण, शासकीयकरण और धनकी लूट बन्द होनी चाहिए ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : न्यूज १८



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