लोकतन्त्रका विकृत रूप, बिहारमें द्वितीय चरणके ६८ में २१ प्रत्याशियोंपर आपराधिक अभियोग प्रविष्ट !!


अप्रैल १५, २०१९

 

बिहारमें द्वितीय चरणके पांच लोकसभा क्षेत्र पूर्णिया, बांका, कटिहार, भागलपुर एवं किशनगंजमें होनेवाले चुनावमें ६८ उम्मीदवारोंमें ३१ प्रतिशतके (२१ उमीदवारों) विरुद्घ विभिन्न प्रकारके आपराधिक प्रकरण प्रविष्ट हैं । सभी २१ प्रत्याशियोंने अपने नामांकन पत्रोंमें आपराधिक प्रकरणकी घोषणा की है ! इनमें निर्दलीय छह, बसपाके तीन, जदयूके चार, जेएमएमके एक, कांग्रेसके तीन, राजद व बसपाके एक-एक प्रत्याशी सम्मिलित हैं । इनमें १४ पर गम्भीर आपराधिक अभियोग प्रविष्ट हैं । इनमें पांच वर्ष या उससे अधिकका दण्डवाले अपराध या ‘गैर जमानती’ अपराधके अभियोग भी सम्मिलित हैं ।

‘बिहार इलेक्शन वॉच व एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’के (एडीआर) अध्ययन ब्यौरेमें यह जानकारी दी गई है । इसके अनुसार ६८ में ३४ प्रत्याशी पांचवींसे १२वीं तककी शिक्षा प्राप्त हैं, जबकि २३ उम्मीदवार स्नातक या उससे अधिककी शिक्षा प्राप्त वाले हैं । एक उम्मीदवारने अपनी शैक्षणिक योग्यता घोषित नहीं की है और वहीं सात उम्मीदवार केवल साक्षर हैं । वहीं, ४५ प्रत्याशियोंने अपनी आयु २५ से ५० वर्षके मध्य घोषित की है । जबकि २१ प्रत्याशियोंने अपनी आयु ५१ से ८० तक घोषित की है । एक प्रत्याशीने अपनी आयु ८० वर्षसे अधिक घोषित की है । दूसरे चरणके दो प्रत्याशियोंने अपने पास शून्य संपत्ति घोषित की है । इनमें जेएमएमके किशनगंजसे प्रत्याशी सुकल मूर्मू व बांकासे निर्दलीय प्रत्याशी संजीव कुमार कुणाल सम्मिलित हैं । वहीं, सबसे अल्प सम्पत्तिवाले तीन प्रमुख प्रत्याशियोंमें केवल चल सम्पत्तिकी घोषणा की है । उनके पास अचल सम्पत्ति कुछ भी नहीं है । इनमें भारतीय बहुजन कांग्रेसके कटिहारसे प्रत्याशी बासुकीनाथ साहके पास केवल चार सहस्र रुपये, पूर्णियासे निर्दलीय प्रत्याशी अख्तर अलीके पास २०,५२४ रुपए और बांकासे निर्दलीय प्रत्याशी मनोज कुमार साहके पास केवल ४१,५०० रुपए हैं ।

 

प्रत्याशियोंके नामांकन पत्रोंके विश्लेषणके अनुसार ६८ में २१ उम्मीदवारोंके पास एक कोटि रुपए या उससे अधिककी सम्पत्ति है । इनमें जदयूके पांचमें चार, कांग्रेसके तीनमें सभी तीन, राजदके दोमें सभी दो, बसपाके पांचमें दो, जेएमएमके तीनमें दो, आपके दोमें एक एवं ३३ निर्दलीय प्रत्याशियोंमें छह प्रत्याशी करोडपति हैं ।

चुनावके समय पार्टी और प्रत्याशी अनाप-शनाप धन व्यय करते हैं; परन्तु चुनाव आयोगको ब्यौरा सही नहीं दे पाते हैं । कई बार तो पार्टी पृथक और प्रत्याशी पृथक व्ययका ब्यौरा प्रदर्शित कर देते हैं !! ‘बिहार इलेक्शन वॉच एवं एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म’के (एडीआर) ब्यौरेके अनुसार, २०१४ के लोकसभा चुनावमें पार्टीसे मिले धनके व्ययका ब्यौरा प्रत्याशियोंने आयोगको नहीं सौंपा । उन्होंने अपने खातेमें इसे शून्य दर्शाया ! इनमें बांकासे निर्वाचित राजदके जयप्रकाश नारायण यादवको पार्टीसे पांच लाख आठ सहस्र ४८० रुपए मिले थे; परन्तु उन्होंने अपने व्ययमें इसे नहीं दर्शाया । इसीप्रकार राजदके टिकटपर विजयी राजेश रंजनको तीन लाख ८१ सहस्र ३६० रुपए और तस्लीमुद्दीनको मिले तीन लाख ८१ सहस्र ३६० रुपएके व्ययकी जानकारी उनके व्यक्तिगत व्ययके ब्यौरेमें नहीं दी गई ।

कांग्रेसके पूर्णियासे प्रत्याशी पप्पू सिंह सर्वाधिक सम्पत्तिके स्वामी हैं । इनके पास ३४१ कोटि ८६ लाख रुपएकी चल व अचल सम्पत्ति है, तो जेएमएमके बांकासे प्रत्याशी राजकिशोर प्रसादके पास १७ कोटि ३४ लाखकी चल-अचल सम्पत्ति है । वहीं तीसरे स्थानपर कांग्रेसके कटिहारसे प्रत्याशी तारिक अनवरके पास ११ कोटि ९२ लाखसे अधिककी चल-अचल संपत्ति है । दूसरे चरणके प्रत्याशियोंके पास औसतन ६.५१ कोटिकी सम्पत्ति है । वहीं, ३२ प्रत्याशियोंने अपनी देनदारीकी भी घोषणा की है । वहीं, ३६ उम्मीदवारोंने अपने आयकर विवरण घोषित नहीं किया है, तो ३२ प्रत्याशियोंने आयकरका विवरण घोषित किया है ।

२०१४ के लोकसभा चुनावमें लोजपा प्रमुख रामविलास पासवानने पार्टी निधिसे मिली राशि तीन लाख रुपएसे अधिक २२ लाख रुपए चुनाव व्ययमें दिखाया तो चिराग पासवानने चार लाख २० सहस्र पार्टीसे मिलनेके पश्चात भी आठ लाख दर्शाए ! रामचंद्र पासवानको आठ लाख मिले तो उन्होंने १४ लाख चुनाव व्ययमें बताए ।


“३१ प्रतिशत प्रत्याशियोंपर आपराधिक अभियोग प्रविष्ट हैं, यदि ये सत्तामें आ गए तो राज्यकी क्या स्थिति करेंगें ?, यह बताना कठिन नहीं है और यह इस तथाकथित लोकतन्त्रका सबसे भद्दा उपहास है कि राजनीतिक दल अपराधियोंको उतारते है और अपराध समाप्त होनेका दावा करते हैं ! कैसे एक दुष्कर्म करनेवाला नारियोंकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है ? कैसे एक अवैध सम्पत्तिवाला नेता निर्धन जनके कष्ट हर सकता है ? अपराधियों और धनिकोंको धनके बलपर चुनाव लडवाकर सभी अपने घर भरनेमें संलग्न हैं और इस सबमें देशकी अधोगति हो रही है और सबसे बडी बात है कि जनता इन्हें चुन भी लेती है । यह स्थिति बताती है कि सुप्त और अविवेकी जनता जन प्रतिनिधि चुनने योग्य नहीं है; अतः पूर्ण परिवर्तन ही इस विकृत हुई राजनीतिको स्वच्छ कर सकता है और तभी भारतका उद्धार सम्भव है ।  ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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