अप्रैल १६, २०१९
पाकिस्तानके स्वतन्त्र मानवाधिकार संगठनने देशमें हिन्दू एवं ईसाई युवतियोंके बलपूर्वक धर्मान्तरण और विवाहपर सोमवार, १५ अप्रैलको चिन्ता प्रकट की और कहा कि गत वर्ष केवल सिन्ध प्रान्तमें ऐसे लगभग १००० प्रकरण सामने आए हैं । अपने वार्षिक ब्यौरेमें पाकिस्तान मानवाधिकार आयोगने (एचआरसीपी) कहा कि शासनने ऐसे बलपूर्वक धर्मान्तरणको रोकनेके लिए अति अल्प प्रयास किए हैं । उसने सांसदोंसे इस चलनको समाप्त करनेके लिए प्रभावी विधान बनानेको भी कहा ।
आयोगने ३३५ पृष्ठोंकी ‘२०१८ में मानवाधिकारकी स्थिति’ ब्यौरेमें कहा है कि २०१८ में सिन्ध प्रान्तमें ही हिन्दू एवं ईसाई युवतियोंसे सम्बन्धित अनुमानित एक सहस्र प्रकरण सामने आए । जिन नगरोंमें बार-बार ऐसे प्रकरण हुए हैं उनमें, उमरकोट, थरपारकर, मीरपुरखास, बदीन, करांची, टंडो अल्लाहयार, कश्मोर और घोटकी सम्मिलित हैं ।
ब्यौरेमें कहा गया है कि पाकिस्तानमें बलपूर्वक धर्मान्तरण और विवाहका कोई प्रमाणिक संख्या विद्यमान नहीं है । उसमें बताया गया है कि ‘सिंध बाल विवाह रोकथाम अधिनियम २०१३’को प्रभावी ढंगसे लागू नहीं किया गया और शासनकी प्रतिक्रिया मिली-जुली रही । यदि पुलिसकी मिली-भगत नहीं रही तो भी अधिकतर प्रकरणमें उसका व्यवहार असंवेदनशील रहा ! २०१८ में पाकिस्तानमें अपनी आस्थाके अनुसार जीवन व्यतीत करनेपर अल्पसंख्यकोंने उत्पीडनका सामना किया, उन्हें बन्दी बनाया गया । यहांतक कि कई प्रकरणमें उनकी मृत्यु भी हुई ।
उल्लेखनीय है कि यह ब्यौरा आनेसे लगभग एक सप्ताह पूर्व इस्लामाबाद उच्च न्यायालयने घोषित किया है कि रवीना (१३) और रीनाको (१५) हिन्दूसे बलपूर्वक मुसलमान नहीं बनाया गया है और उन्हें उनके पतियोंके साथ रहनेकी आज्ञा दे दी ।
“यह ब्यौरा पाकिस्तान शासन, पुलिस और न्यायालयोंकी वास्तविकता उजागर करता है । एक ऐसा प्रकरण नहीं, जहांपर हिन्दू परिवारको कभी न्याय मिला हो, इस्लामिक मानसिकताकी पुलिस अलगसे शोषण करती है और इमरान खान लज्जहीन होकर भारत प्रशासनको अलपसंख्यकोंको अधिकार दिलाना सीखानेकी बात कर रहे हैं !! मानवताका सिर झुका देनेवाले ये प्रकरण केवल एक विकृत इस्लामिक मानसिकतावाले देशमें ही सम्भव है और इसके पीछे भी शान्तिदूत मौलवियोंकी जिहादी शिक्षा कार्य करती है, इससे ज्ञात होता है कि शरियत और इस्लामिक शिक्षा, जो इन्हें धर्मपरिवर्तन और हिन्दुओंको नष्ट करनेकी प्रेरणा देती है, वह अब एक कोढका रूप ले चुकी है और उस कोढको समाप्त कर देना ही विश्वके लिए एकमात्र उपाय है; क्योंकि यह समस्या केवल पाकिस्तानकी नहीं है, वरन जहां-जहां इस्लामिक शिक्षा गई है, उसी देशको इस भयानक रोगने ग्रसित कर लिया है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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