फारूक अब्दुल्लाके विषकारी बोल, यदि मेरा परिवार भारतको तोडना चाहता तो कोई हिंदुस्तान होता ही नहीं !!


अप्रैल १५, २०१९

अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवारपर देशको तोडनेके प्रयास करनेके प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके आरोपोंके एक दिवस पश्चात नेशनल कान्फ्रेंसके अध्यक्ष फारूक अब्दुल्लाने सोमवार, १५ अप्रैलको उत्तर देते हुए कहा कि यदि उनका परिवार भारतको तोडना चाहता तो ‘कोई हिन्दुस्तान होता ही नहीं ।’ कठुआमें रविवार, १४ अप्रैलको जनसभाको सम्बोधित करते हुए प्रधानमन्त्रीने अब्दुल्ला और मुफ्तीपर लक्ष्य साधते हुए कहा था कि दोनों परिवारोंने जम्मू कश्मीरकी तीन पीढियोंको नष्ट कर दिया और वह उन्हें भारतको विभाजित नहीं होने देंगें । अब्दुल्लाने उत्तरमें कहा कि मोदी ही देशको तोडनेका प्रयास कर रहे हैं; परन्तु वह सफल नहीं होंगें । उन्होंने कहा, ‘‘हमारी पार्टी सभी लोगोंके कल्याणके लिए लडती है चाहे मुस्लिम हों, हिन्दू हों, सिख हों, ईसाई हों या बौद्ध हों । हम लडते रहेंगें । मोदी पूरी शक्ति लगा दें तो भी भारतको नहीं तोड पाएंगें । मैं आपको आज यहांसे बताना चाहता हूं कि आप तोडनेका प्रयास करेंगें; परन्तु भारत टूटेगा नहीं । आप अब्दुल्ला परिवारपर भारतको विभाजित करनेके प्रयासका आरोप लगाते हैं, यदि हमें भारतको विभाजित करना होता तो कोई भारत नहीं होता ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मोदीको स्मरण करना चाहिए कि १९९६ में जब कोई चुनावके लिए सज्ज नहीं था, तो मैं था जो आगे बढा, जबकि मेरे सहयोगियोंने कहा कि हमें चुनाव नहीं लडना चाहिए; परन्तु मैं चाहता था कि जनता कठिनाइयोंसे उबरे । मैंने यह बीडा उठाया और कठिन समयमें आगे बढा । आपको (मोदी) यह बात कभी नहीं भूलनी चाहिए । तब यहां कोई नहीं था; परन्तु अब आप चिल्ला रहे हैं ।’’ केन्द्रद्वारा सशक्त राजद्रोह विधान बनाने सम्बन्धी केन्द्रीय गृह मन्त्री राजनाथ सिंहके वक्तव्यका वर्णन करते हुए अब्दुल्लाने कहा, ‘‘आप क्या करते हैं, हम देखेंगें; परन्तु मोदी और भाजपा कश्मीरियोंका हृदय नहीं जीत सकते ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आप कहते हैं कि हम निष्ठावान नहीं हैं, यदि हम नहीं, तो तुम भी तो बडे हृदयके नहीं । आप कहते हैं कि हम आपके अटूट अंग हैं । हम कैसे आपके अटूट अंग हैं ? कहां हैं ? यह असत्य है । यदि हम आपके अटूट अंग हैं तो हमारे साथ न्याय कीजिए ।’’ पूर्व केन्द्रीय मन्त्रीने कहा कि मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह देशको नष्ट कर रहे हैं और वे कश्मीरमें चुनावी रैली करके दिखाएं । उन्होंने कहा, ‘‘मोदी कहां रैली करते हैं ? कठुआमें, अखनूरमें । वह कश्मीरमें मुसलमानोंको सम्बोधित नहीं करते; क्योंकि जानते हैं कि उन्होंने उनके साथ विश्वासघात किया है । आपने जब आवाज नहीं उठाई, जब पाकिस्तान जानेसे मना करनेवाले और भारतको स्वीकार करनेवाले भारतीय मुस्लिमोंपर आपके लोगोंने आक्रमण किया । क्या वे भारतीय नहीं थे ? क्या उन्होंने भारतके लिए अपना रक्त नहीं बहाया ?’’ अब्दुल्लाने कहा, ‘‘जब जलियांवाला बागमें जनरल डायरने लोगोंको मारा तो कौन नेता लडा था ? उनका नाम सैफुद्दीन किचलू था । वह बारामूलाके रहनेवाले कश्मीरी थे और मारे गए सैकडों लोग कश्मीरसे थे । क्या आपको उनकी स्मृति भी है या क्या आपने कभी किचलूका नाम लिया ? आप केवल उन्हें स्मरण रखते हैं जिन्होंने महात्मा गांधीकी हत्या की । भारतमें गोडसेका मंदिर बनाया जाता है और आप कुछ नहीं कहते । क्या मुसलमान भारतका अंग नहीं हैं ? हम देशको नहीं विभाजित कर रहे; परन्तु आप कर रहे हैं, वो भी धार्मिक आधारपर । आप और अमित शाह भारतको नष्ट कर रहे हैं; इसलिए हमपर आरोप मत लगाइए ।’’


“एक ओर अब्दुल्ला स्वयंको राष्ट्रनिष्ठ बता रहे हैं तो दूसरी ओर कह रहे हैं कि हम चाहते तो विभाजन हो जाता ! यह कैसी राष्ट्रीयता है ? और अब्दुल्लाको कश्मीरी मुसलमान, जो कि आक्रान्ता है और बाहरी हैं उनके साथ हुआ अत्याचार दिखाई दे रहा है तो उन कश्मीरी पण्डितोंकी वेदना क्यों नहीं दिखाई देती, जो वहांके मूल निवासी होते हुए भी रातों-रात वहांसे मार-मार भगा दिए गए, उनके साथ अमानवीय कृत्य किए गए, तब यह मानवता कहां थी ? मस्जिदों, मदरसों और इस्लामिक संस्थाओंके आश्रयमें रह रहे थे, तब अब्दुल्ला क्यों नहीं राष्ट्रहितमें इनके विरुद्घ आगे आए ? तोडनेमें कोई कमी कहां रखी है, जो अब बडी-२ बातेंकर स्वयंको राष्ट्रभक्त सिद्ध कर रहे हैं ।  इन सबसे ही स्पष्ट है कि इनकी राष्ट्रीयता मात्र एक दिखावा है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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