अप्रैल १६, २०१९
मतदान २०१९ के समय राजनीतिक दलोंपर ऑनलाइन विज्ञापन व्यय २०१४ के लोकसभा चुनावकी तुलनामें दोगुणा होकर ४०० से ५०० कोटि रुपएतक पहुंचनेका अनुमान है । विशेषज्ञोंका कहना है कि स्मार्टफोनकी पहुंच बढने और अन्तर्जाल सेवा अल्प शुल्कमें होनेके कारण डिजिटल व्ययमें वृद्धि होगी ।
एक विशेषज्ञका कहना है कि डिजिटल क्षेत्रमें विज्ञापन व्ययके प्रकरणमें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सबसे आगे है । ‘देंत्सु एजिस नेटवर्क’के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आशीष भसीनने कहा कि २०१९ के मतदानमें चुनाव अभियानपर कुल विज्ञापन व्यय २५०० से ३,००० कोटि रुपए रहेगा । कंपनीके भारतमें अधिकारी भसीनने कहा कि सामाजिक प्रसार माध्यमपर विज्ञापन व्यय लगभग ५०० कोटि रुपए रहेगा ।
एक अन्य विज्ञापन व्यापारीने कहा कि गत पांच वर्षोंके समयमें ‘स्मार्टफोनके’ विक्रयमें आई तीव्रतासे राजनीतिक दलोंका ऑनलाइन प्रचारपर व्यय बढ रहा है । इसके अतिरिक्त दूरसंचार कंपनियोंके मध्य प्रतिस्पर्धाके कारण अन्तर्जालीय सेवाएं भी अल्प शुल्कोंमें मिल रही हैं।
‘गूगल’की राजनीतिक विज्ञापनोंपर पारदर्शिताके अनुसार, इस वर्ष १९ फरवरीसे उसके विभिन्न डिजिटल खंडोंपर कुल व्यय ८ कोटि ६३ लाख ११ सहस्र ६०० रुपए रहा है । फेसबुकके इसीप्रकारके ब्यौरेके अनुसार, कुल ६१,२४८ विज्ञापनोंपर कुल व्यय १२ कोटि ८ लाख ४५ सहस्र ४५६ रुपए रहा है ।
“शासक वर्गोंके पास योजनाओंके लिए धन नहीं होता है, उसके लिए मन्दिरोंसे लिया जाता है और मतदानपर व्यर्थ करनेके लिए ५०० कोटि रूपए है ! विडम्बना है कि जिस देशमें मूलभूत सुविधाएं तक नागरिकोंको प्राप्त नहीं है, वहां मतदानपर सहस्रों कोटि रुपए व्यर्थ कर दिए जाते हैं । वस्तुतः मतदान प्रसारपर किसी भी प्रकारका कोई भी व्यय या प्रचार बन्द होना चाहिए । यदि कोई दल कार्य करेगा तो वह धरातलपर दिखेगा और वोट स्वतः ही मिल जाएगा !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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