अप्रैल १७, २०१९
पश्चिम बंगालके सत्ताधारी दल तृणमूलकी एक विधायिकने केन्द्रीय सुरक्षा बलोंके लिए अपमानजनक भाषाका प्रयोग किया है । चकदाहाकी विधायिक रत्नाने तृणमूल कार्यकर्ताओंको सम्बोधित करते हुए कहा कि केन्द्रीय बलको खदेडनेका समय आ गया है ।
नदिया जनपदके सिमुराहीकी एक भरी सभामें बंद द्वारके मध्य कार्यकर्ताओंको सम्बोधित करते हुए तृणमूल विधायिकने कहा कि यदि आप कोई युद्ध जीतना चाहते हैं तो इसका कुछ भी अच्छा या बुरा ढंग नहीं होता । विधायिकने कहा कि इसके लिए अलोकतान्त्रिक या कोई भी ऐसा ढंग अपनाया जा सकता है । विधायिकने ‘किसी भी माध्यमका प्रयोग करते हुए’ इस ‘युद्ध’को विजयी करनेकी बात कही ।
“मैंने २०१६ के विधानसभा चुनावमें देखा था कि कैसे ये अर्धसैनिक बलोंके सैनिक हमरे लडकोंकी पिटाई करते हैं । उस समय अत्यधिक मारपीट हुई थी । इस समय स्थिति और भी अधिक चुनौतीपूर्ण है; परन्तु उद्विग्न होनेकी कोई बात नहीं है । मैं एक-एक कर सभी बूथोंपर जाऊंगी और हम लोग केन्द्रीय सुरक्षा बलोंके सैनिकोंसे भयभीत नहीं होंगें । यदि केन्द्रीय सुरक्षा बल अधिक सक्रिय होते हैं तो मैं महिला मोर्चाके सदस्योंसे निवेदन करूंगी कि वो सभी झाडू उठाएं और उन्हें अपने क्षेत्रसे भगा डालें ।”
एक अन्य तृणमूल नेता अनुब्रता मंडलने भी केन्द्रीय बलोंको ‘नहीं छोडने’की बात कही है । एक रैलीको सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा, “आपलोगोंको भयभीत होनेकी कोई आवश्यकता नहीं है । केन्द्रीय सुरक्षा बलके सैनिक तो आएंगे ही । इसके लिए कोई चिंताकी बात नहीं है; परन्तु यदि वो कुछ अनुचित करें तो उन्हें छोडना नहीं है ।”
“केन्द्रीय बल बिना ही कारण किसीको क्यों मारेगा ?, अवश्य ही तृणमूलके सदस्योंने कुछ उपद्रव किया होगा, तभी कार्यवाही हुई होगी; अन्यथा कोई कार्यवाही क्यों की जाती ? वैसे भी तृणमूल राष्ट्रद्रोहके लिए प्रसिद्ध हो चुकी है तो ऐसे दलोंपर तो कठोरसे कठोर कार्यवाही होनी चाहिए और चुनाव आयोग भी विधायिका रत्नापर कठोर कार्यवाही करे; क्योंकि यह प्रत्यक्ष रूपसे केन्द्रीय सुरक्षा बलोंके विरुद्ध हिंसाकी चेतावनी है तो इसे गम्भीरतासे लेना आवयक है । ” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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