प्रभु श्रीरामकी आरती उतारनेवाली मुस्लिम महिलाओंके विरुद्घ धर्मान्ध उलेमाओंका फतवा !


अप्रैल १७, २०१९

प्रभु श्रीरामके जन्मोत्सव “श्रीरामनवमी”के पावन पर्वपर वाराणसीमें कुछ मुस्लिम महिलाओंने साम्प्रदायिक सद्भाव, आपसी प्रेमका उदाहरण प्रस्तुत करते हुए प्रभु श्रीरामकी आरती तथा हिन्दू-मुस्लिम एकतापर बल दिया । मुस्लिम महिलाओंने श्रीरामकी आरती इसलिए की थी

, ताकि इससे हिन्दू तथा मुस्लिमोंके मध्य आपसी शान्ति बनेगी, सद्भाव बढेगा; परन्तु इसके पश्चात उनके साथ वो हुआ, जो उन्होंने सोचा भी नहीं था ।

 

समाचारके अनुसार, वाराणसीमें मुस्लिम महिलाओंद्वारा श्रीरामकी आरती किए जानेपर देवबंदी इस्लामिक उलेमा भडक उठे हैं तथा उलमाने महिलाओंको इस्लामसे बाहर कर दिया है । देवबंदी उलमाने कहा कि यदि कोई मुसलमान अल्लाहके अतिरिक्त किसी अन्यकी पूजा करता है तो उसे तुरन्त अल्लाहसे क्षमा मांगनी चाहिए । फतवा ऑनलाइनके प्रभारी मुफ्ती अरशद फारुकीने कहा कि इस्लाम अल्लाहके अतिरिक्त किसी औरकी पूजा करनेकी आज्ञा नहीं देता । यदि कोई मुसलमान ऐसा करता है तो उसे अल्लाहसे क्षमा मांग लेनी चाहिए ।

 

‘ऑल इंडिया जमीयत दावातुल मुसलीमीन’के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोराने कहा कि वाराणसीमें कुछ बुर्कानशी महिलाओंने श्रीरामकी पूजा अर्चनाकर, उनकी आरती उतारी । यदि वो महिलाएं मुस्लिम हैं तो उन्होंने गैर इस्लामिक कार्यको अपनाया है । उन्होंने कहा कि शरीयतमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति पुरुष या महिला जिस धर्मकी वस्तुओंको अपनाएगा तो वो स्वयं उसी धर्ममें परिवर्तित हो जाएगा; क्योंकि इस्लाम अल्लाहके अतिरिक्त किसी औरकी पूजा करनेकी आज्ञा नहीं देता ।

 

“मुस्लिम महिलाओंने जो किया वह मानवतासे प्रेरित होकर किया, जिसमें कुछ भी अनुचित नहीं है और जो उलेमा कर रहे हैं, उसे ही धर्मान्धता या पागलपन कहते हैं । बडी-बडी दाढी रखकर, सुगन्धित इत्र लगानेसे उलेमा बने इन लोगोंसे अधिक बुद्धि, विवेक और अल्लाहका ज्ञान तो इन मुस्लिम महिलाओंको हैं । वास्तवमें इस्लाम ऐसे विक्षिप्त मानसिकताके लोगोंसे भरा पडा है, तभी तो भारतके लिए ही नहीं वरन समूचे विश्वके लिए आज संकट बन गया है । मुसलमान समुदायके सभी भद्र व शालीन लोगोंने ऐसे अभद्र उलेमाओंकी विषकारी वाणीका मुखर होकर विरोध करना चाहिए और धर्मनिरपेक्षताका राग आलापनेवाले समाचार माध्यम भी इसे दिखाए कि देखिए यदि धर्मनिरपेक्षताका प्रयास भी किया तो आपकी ऐसी स्थिति होगी कि समाजसे ही बाहर कर दिए जाओगे !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : ऑप इण्डिया



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