अप्रैल १८, २०१९
पश्चिम बंगालके पुरुलिया जनपदमें एक भाजपा कार्यकर्ताका शव वृक्षसे लटका मिला । मृतक शिशु पाल २२ वर्षीय युवक था और स्थानीय ग्राम पंचायतके भाजपा सदस्यका पुत्र था । पश्चिम बंगालके पुरुलिया जनपदमें यह तीसरी ऐसी घटना है । इससे पूर्व दो भाजपा कार्यकर्ता त्रिलोचन महतो और दुलाल कुमार भी बलरामपुर क्षेत्रसे लापता हो गए थे और बादमें ज्ञात हुआ कि उनकी हत्या कर दी गई थी । बादमें महतोका शव एक वृक्षसे लटका मिला था, जबकि कुमार एक उच्च दाब विद्युतके खम्बेसे लटके पाए गए थे !
रायगंज पीसीके गोलपोखरमें एक चैनलके पत्रकार और फोटोग्राफर की भी पिटाई की गई है । इस प्रकरणमें सहकर्मियोंने उन्हें बचाया और उन्हें चिकित्सालय ले गए । मारपीटके कारण पत्रकारको काफी चोटें आईं और काफी रक्त भी बहा । उनपर यह आक्रमण तब हुआ जब एक बूथपर डराने-धमकानेका समाचार पाकर उसकी पत्रकारिता करने गए थे, यहींपर उन्हें रक्तरंजित कर दिया गया ।
पश्चिम बंगालमें तृणमूलका राजनीतिक शत्रुता भरा व्यवहार साधारण हो गया है । ११ अप्रैलको सम्पन्न हुए लोकसभा चुनावके प्रथम चरणके समय भी पश्चिम बंगालमें हिंसाकी कई घटनाएं प्रविष्ट की गईं थी ।
इसीप्रकारके हिंसात्मक समाचारका प्रकटीकरण ओडिशामें भी हुआ । यहां लोकसभा और विधानसभा चुनावोंके द्वितीय चरणकी पूर्व संध्यापर गंजम जनपदके अगाझोला गांवमें एक भाजपा कार्यकर्ताका शव मिला । स्थानीय समाचारोंके अनुसार, २६ वर्षीय बीजेपी कार्यकर्ता सदानंद बेहराका शव रक्तरंजित था ।
समाचारके अनुसार, गांवके स्थानीय लोगोंने सदानंदके शवकी खोज की और पुलिसको सूचित किया । उसके पश्चात पुलिसने शवको जांचके लिए भंजनगर चिकित्सालय भेज दिया ।
यहां यह उल्लेखनीय है कि एक सप्ताह पूर्व, उसी भंजनगर क्षेत्रमें भाजपा विधायक प्रत्याशीके भतीजेपर हिंसक उपद्रवियोंद्वारा आक्रमण किया गया था और उन्हें भी गंभीर चोटें लगी थीं । भाजपा विधायक प्रद्युम्न नायकके भतीजे अजीत प्रधानपर केन्द्रीय मन्त्री धर्मेन्द्र प्रधानकी एक सार्वजनिक बैठकके पश्चात हिंसक आक्रमण किया गया था । नायकने आरोप लगाया था कि टूटू प्रधान नामक एक स्थानीय सरपंचने आक्रमणका आदेश दिया था ।
“तृणमूलकी राजनीतिक कुण्ठा और विद्रोह इतना बढ गया है कि अब वे राजनीति नहीं मरने-मारनेके आसुरी कृत्यपर आ गए हैं । ऐसेमें भाजपा अपने कार्यकर्ताओंकी रक्षाके लिए कोई ठोस पग क्यों नहीं उठाती है ? भाजपामें सभी राष्ट्रनिष्ठ अपना घर आदि छोड देशके लिए प्रचार करने आते हैं तो क्या उनका इतना भी उत्तरदायित्व नहीं है कि कोई ठोस पग उठाए और यह आरम्भसे ही हो रहा है कि भाजपाके कार्यकताओंकी हत्याएं की जा रही है, ऐसेमें जो पग आरम्भमें ही उठाना चाहिए था, वह अब तक नहीं हुआ है, यह लज्जाजनक है । क्या राष्ट्रनिष्ठोंको ऐसे प्रचारके लिए आना चाहिए । यह तो प्राण व्यर्थ करने जैसा है । देशभक्तके प्राणोंका मोल राजनीतिक मंचसे किसीको भला बुरा कहनेसे नहीं लगता है, उसके लिए कठोर कार्यवाही करनी पडती है, क्या यह बात अब राष्ट्रनिष्ठ दलोंको बतानी पडेगी ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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