मार्च २०, २०१९
लोकसभाके तृतीय चरणके मतदानके कुल ११६२१ प्रत्याशियोंमेंसे ५७० ने अपने विरुद्घ आपराधिक प्रकरण प्रविफ्ट होनेकी बात स्वीकार की है । ‘एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म’ने (एडीआर) शुक्रवार, १९ अप्रैलको प्रमुख राजनीतिक दलोंके आंकडे जारी किए हैं । यह आंकडे उम्मीदवारोंके अपने शपथपत्रमें दी गई जानकारीके आधारपर दिए गए हैं ।
२३ अप्रैलको होनेवाले मतदानके उम्मीदवारोंमें ५७० पर आपराधिक प्रकरण प्रविष्ट हैं । इनमें भी तृतीय चरणके कांग्रेसके ९० उम्मीदवारोंमें ४० के विरुद्घ आपराधिक प्रकरण प्रविष्ट हैं । जबकि भारतीय जनता पार्टीके कुल ९७ उम्मीदवारोंमें ३८ के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण प्रविष्ट हैं । वहीं, माकपाके सबसे अल्प उम्मीदवारोंके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण हैं ।
तृतीय चरणमें कुल १४ उम्मीदवारोंने दोषी सिद्ध होनेकी बात स्वीकारी है, जबकि १३ उम्मीदवारोंके विरुद्ध हत्याके गम्भीर प्रकरण प्रविष्ट हैं । २९ उम्मीदवारोंने महिलाओंके विरुद्ध अपराध जैसे दुष्कर्म, आक्रमण या दुर्व्यवहार आदिके प्रकरण प्रविष्ट होनेकी बात अपने याचिकापत्रमें (हलफनामेमें) स्वीकार की है । केवल २६ उम्मीदवारोंने अपने विरुद्घ घृणा भरे भाषण देनेके लिए प्रकरण प्रविष्ट होनेकी बात मानी है ।
संख्याके अनुसार तृतीय चरणके चुनावमें कुल ११५ संसदीय सीटोंमेंसे ६३ संसदीय क्षेत्रोंको संवेदनशीलताके आधारपर ‘रेड अलर्ट’की श्रेणीमें रखा गया है । ये वे स्थान हैं, जहां तीन या उससे अधिक उम्मीदवारोंने अपने विरुद्घ अपराधिक प्रकरण प्रविष्ट होनेकी बात स्वीकार की है ।
‘एडीआर’ने अपने ब्यौरेमें बताया है कि अगले चरणमें ३९२ उम्मीदवारोंने अपनी निजी सम्पत्ति कोट्यावधि रुपयोंमें बताई है । समाजवादी पार्टीके कुमार देवेंद्र सिंह यादवने अपनी कुल सम्पत्ति २०४ कोटि रुपयोंकी बताई है ।
ब्यौरेमें यह भी बताया गया है कि एक कोटि रुपयेसे अधिककी सम्पत्ति बतानेवाले सभी उम्मीदवारोंके पास औसतन २.९५ कोटि रुपयोंकी सम्पत्ति है । आपराधिक प्रकरणके अतिरिक्त चुनाव उम्मीदवारोंके घोषणापत्रोंको (हलफनामोंको) वित्तीय और शैक्षणिक आधारपर भी जांचा गया है ।
“कोई करोडपति है, कोई अपराधी है, कोई दुष्कर्मका आरोपी है और विचित्र है कि ये सभी हमपर शासन करनेके लिए पंक्तिमें खडे हैं । अर्थात सभ्य नागरिकोंपर अब असभ्य लोग राज करनेके लिए खडे हुए है और निश्चित ही यह इस महान लोकतन्त्रकी ही देन है । आज देशको स्वतन्त्र हुए ७० वर्ष हो गए हैं और ऐसे ही इस लोकतन्त्रको बने हुए तो इस लोकतन्त्रकी कोई एक महान उपलब्धि है क्या, सिवाय इसके कि जो कुछ भी हमारे पास था, वह भी लुट गया है और परितोषमें माले हैं अपराधी नेतागण । इस विकट परिस्थितिको ठीक करने हेतु अब केवल और केवल हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता है, यह स्पष्ट है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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