अप्रैल २१, २०१९
श्रीलंकाके कई क्षेत्रोंमें ईस्टरके समय ८ बम विस्फोट हुए हैं । विस्फोट तीन चर्च और ४ विश्रामालयोंमें (होटलमें) हुआ है । घटनामें मरनेवालोंकी संख्यख बढकर २१५ पहुंच चुकी है । वहीं वर्तमान अंक ब्यौरेके अनुसार चोटिलोंकी संख्या भी ५०० से अधिक बताई जा रही है । मरनेवालोंमें ३५ विदेशी हैं । पुलिसने कहा कि कोलम्बोमें ‘सेंट एंथनी चर्च’, नौगोंबोमें ‘सेंट सेबेस्टियन चर्च’ और बट्टिकलोबामें एक चर्चको लक्ष्य बनाया गया । इसके अतिरिक्त होटल शांग्री-ला, सिनामोन ग्रैंड और किंग्सबरीमें भी विस्फोट हुआ है ।
विदेश मन्त्री सुषमा स्वराजके अनुसार, कोलंबोमें भारतीय उच्चायोगने जानकारी दी है कि ‘नेशनल हॉस्पिटल’ने उन्हें रविवार, २१ अप्रैलको हुए विस्फोटमें तीन भारतीय नागरिकोंकी मृत्युके बारेमें सूचित किया है । मृतक भारतीयोंका नाम लक्ष्मी, नारायण चंद्रशेखर और रमेश बताया जा रहा है ।
रविवार सन्ध्यासे पहले ही देशमें ‘कर्फ्यू’ लगा दिया गया है, जो अगले आदेशतक जारी रहेगा । साथ ही सुरक्षा बलोंको अगले १० दिनोंतक सतर्क रहनेका आदेश दिया गया है । वहीं ‘सोशल मीडिया’पर भी तत्काल प्रभावसे रोक लगा दी गई है । सुरक्षा अधिकारीने कहा कि उन्हें संदेह है कि आत्मघाती आक्रान्ताद्वारा दो गिरिजाघरोंमें विस्फोट किया गया है । अधिकारियोंके अनुसार, मारे गए लोगोंमें ३५ विदेशी नागरिक सम्मिलित हैं ।
वहीं निर्वासित पाकिस्तानी नेता और ‘मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट’के (एमक्यूएम) संस्थापक अल्ताफ हुसैनने दावा किया है कि कोलम्बो विस्फोटमें पाकिस्तानी गुप्तचर विभाग ‘आईएसआई’का हाथ हो सकता है । हुसैनने संयुक्त राष्ट्रके महासचिवसे अपनी याचिकामें कहा, “इन बम विस्फोटमें ‘आईएसआई’के सम्मिलित होनेकी सम्भावनाको अनदेखा नहीं करना चाहिए । विश्वभरमें आतंकवादकी प्रत्येक दुर्घटनाकी नींव पाकिस्तानमें ही रखी गई थी ।” हुसैनके अनुसार ‘एमक्यूएम’का प्रत्येक कार्यकर्ता कोलम्बो विस्फोटसे व्यथित है । उन्होंने बल देते हुए कहा, “आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है, जिसे विश्वसे पूर्णतः नष्ट करना होगा ।
“विश्व इसे स्वीकार करे या न करे, गत कुछ समयसे यूरोप और विश्वके अनेक भागोंमें हो रहे मस्जिदों और गिरिजाघरोंपर आक्रमण पुनः ईसाई बनाम ईस्लाम है । गत माह न्यूजीलैण्डकी मस्जिदोंपर ईसाईयोंद्वारा आक्रमण किया गया, जिसमें लिखा हुआ था कि मुसलमान प्रजननकर हमारा धार्मिक सन्तुलन बिगाड रहे हैं । तदोपरान्त क्राइस्टचर्चकी घटनाके पश्चात बर्मिंघममें मस्जिदोंपर और अब श्रीलंकामें चर्चोंमें अनेक ईसाईयोंका मारना, यह सब प्रकरण उजागर कर रहे हैं कि विश्वपर एकाधिकार करनेकी इच्छासे उपजे दो पन्थ अब एक दूसरेको मरने-मारनेपर लगे हैं । दोनों एक दूसरेसे भयभीत है और एकाधिकार पाना चाहते हैं और अल्ताफ हुसैनका कहना भी उचित है कि आतंकका मूल ईस्लामिक मानसिकता और उसका जनक व पोषक पाकिस्तान व अन्य क्रूर ईस्लामिक देश हैंं, जो जिहादियोंके हाथमें आइएसका ध्वज देकर अन्योंको समाप्त देनेकी प्रेरणा देते हैंं । आरम्भ हुई इस लडाईका परिणाम तो भविष्य ही जानता है; परन्तु एक बात स्पष्ट है कि हानि मानवताकी ही हो रही है । एकाधिकार छोडकर यदि मनुष्योंने सनातनके ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’के सिद्धान्तको माना होता तो आज इस विश्वकी छवि कुछ और ही होती !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक, अमर उजाला & ऑप इण्डिया
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