अप्रैल २१, २०१९
यह कई वर्षों पूर्व ही उजागर हो चूका है कि राहुल गांंधी विदेशोंमें रौल विंचीके नामसे भी घूमते थे । कई विदेशी विश्वविद्यालयमेेंं विभिन्न माध्यमोंंसे शिक्षा ली है और उन्होंने राहुल गांंधी नहीं वरन ये सबकुछ रौल विंची बनकर किया है !
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयने अब यह भी पुष्टि कर दी है कि राहुल गाँधी ‘एम.फील’ करते हुए रौल विंचीके नामसे ही पढाई कर रहे थे !
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयने यह भी पुष्टि की कि राहुल गांंधीने अपना ‘एम.फील’ वर्ष २००५ में नहीं वरन १९९५ में किया था !

राहुल गांंधी घूम फिरकर भारत वापस आ गए और सीधे २००४ में उन्होंने लोकसभा चुनाव लडा और अमेठीके लोगोंंने उनको सांसद बना दिया, रौल विंचीसे वो वापस राहुल गांंधी बन गए और अब भी वो राहुल गांंधीके नामसे भारतमें घूम रहे हैंं !!
“यदि राहुल गांधी ईसाई है तो उन्हें यह प्रकट करनेमें लज्जा क्यों आ रही है ? क्या भारतकी जनताको हिन्दू नामसे बहलानेके लिए ही यह नाम परिवर्तन किया है ? वैसे यह लोकतन्त्रकी आजतककी सबसे बडी विडम्बना रही है कि राहुल गांधीको लोगोंने वोट देकर विजयी बना दिया; परन्तु गांधी परिवारकी वास्तविक धीरे-धीरे अब देशके समक्ष उजागर हो रही है कि कैसे एक परिवारने सत्ताके नामपर समूचे देशको भ्रमित किए रखा । यदि यह सत्य है तो इसपर कडी कार्यवाही हो और राहुल गांधीको मतदान प्रतिस्पर्धासे बाहर किया जाए !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : डीबीएन
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