अप्रैल २९, २०१९
पश्चिम बंगालमें मतदानके समय हिंसा रुकनेका नाम नहीं ले रही है । यहां राजनीतिक दलोंके कार्यकर्ता अबतक एक-दूसरेपर आक्रमण करते रहे हैं; परन्तु अब टीएमसी कार्यकर्ताओंने समाचार माध्यमोंको भी लक्ष्य बनाना आरम्भ कर दिया है ! सोमवार, २९ अप्रैलको मतदानके समय टीएमसी कार्यकर्ताओंने समाचार माध्यम ‘आजतक’के दलपर आक्रमण कर दिया ! ‘आजतक’ संवाददाता मनोज्ञा लोइवालको टीएमसी कार्यकर्ताओंने मारा ! अबतक इस प्रकरणमें टीएमसीकी ओरसे कोई वक्तव्य नहीं आया है !
मनोज्ञाने बताया कि जामुरियामें निरन्तर समाचार आ रहे थे कि वहां टीएमसी और बीजेपीके कार्यकर्ताओंमें झडप हो रही है । वहां मतदान केन्द्रपर बीजेपी कार्यकर्ताओंको नहीं जाने दिया जा रहा था । बाबुल सुप्रियो जब वहां पहुंचे तो उनके वाहनतक पहुंचकर ‘आजतक’ने भी उनसे बात करनेका प्रयास किया । बाबुलसे प्रश्नोत्तर करनेके मध्य ही पीछे उपस्थित टीएमसी समर्थक अपशब्द कहने लगे । इसके पश्चात वे मारने-पीटनेका प्रयास करने लगे, पत्थर भी फेंके गए ! लक्ष्य करते हुए टीएमसी समर्थक पूछ रहे थे कि आपने किस प्रत्याशीसे कितने पैसे लिए हैं ? यहां प्रातःकालसे समाचार माध्यमोंको लक्ष्य बनाया जा रहा है ।
मनोज्ञाने बताया कि वे जब बाबुलसे प्रश्न पूछ रही थीं, तभी पीछे तीन-चार टीएमसी समर्थक दुर्व्यवहार करने लगे । अधिकतरका मुख वस्त्रसे ढंका था । ये लोग धूपसे बचनेके लिए नहीं, वरन मुख छिपानेके उद्देश्यसे ढंके हुए थे । मनोज्ञाने बताया कि यहां जो भी टीएमसीका सत्य दिखानेका प्रयास कर रहा है, उसपर ही प्रश्न कर दिया जा रहा है ! उसे ही लक्ष्य बनाते हुए मारपीट की जा रही है !
मनोज्ञाने कहा कि अभीतक बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ता एक दूसरेसे मारपीट कर रहे थे; परन्तु अब समाचार माध्यमोंको भी नहीं छोडा जा रहा है । मनोज्ञाने कहा कि मुझे भी मारा गया और मेरे कैमरापर्सन तापस बेरीको भी मारा गया है । इसके पश्चात ये लोग मारनेके लिए हम लोगोंका पीछा भी करते रहे ।
मनोज्ञाने कहा कि बंगालमें ममताको समाचार माध्यमोंने ही बनाया है । २००५-०६ के समय नंदीग्राम हो या सिंगूरमें २६ दिवस चला ममताका आंदोलन, वे उस मध्य भी निरन्तर पत्रकारिता कर रही थीं । उस समय ममता सत्तामें नहीं थीं; परन्तु अब जब वे सत्तामें हैं, तो जो सत्ताके विरुद्घ उचित समाचार दिखा रहा है, उसे ही टीएमसी लक्ष्य बना रही है !
https://twitter.com/SuPriyoBabul/status/1122769561260965888
“अबतक तो भाजपाके अन्य कार्यकर्ताओंको मारा जाता था; परन्तु अब सत्य उजागर करनेवाले समाचार माध्यमोंके पत्रकारोंको भी मारा जा रहा है ! इस लोकतन्त्रकी ऐसी भयावह स्थिति कश्मीर और माओवादी क्षेत्रोंमें देखनेको मिलती थी; परन्तु अब एक सभ्य राज्य बंगालमें भी दिख रही है, यह केवल निधर्मी लोकतन्त्र और राज्यके इस्लामीकरणके कारण ही हुआ है । जहां-जहां इस्लामका प्रचार-प्रसार होता गया, वहां ऐसी स्थिति स्वतः ही निर्मित होती है । ममता बैनर्जीने भी सत्ताकी लालसामें एक स्वर्णिम इतिहासवाले राज्यकी दुर्दशा की है, जो अब उन्हें सत्तासे बाहरकर ही ठीक की जा सकती है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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