अप्रैल ३०, २०१९
‘एनआईए’ने केरलसे एक आतंकीको बन्दी बनाया है, जो श्री लंका बम विस्फोटमें सम्मिलित आतंकवादी जहरान हाशिमका अनुयायी है और आतंकी संगठन ‘आईएसआईएस’से संवेदना रखता है । केरलसे पकडे गए इस व्यक्तिका नाम रियास अबूबकर है और ये किसी बडे आतंकी आक्रमणका षडयन्त्र कर रहा था । वह केरलमें आत्मघाती आक्रमण करनेकी प्रतीक्षामें था, ऐसा उसने ‘एनआईए’के समक्ष स्वीकार किया है । श्री लंकामें हुए श्रृंखलाबद्ध विस्फोटमें ३६० से भी अधिक लोगों मारे जा चुके हैं और उसका षडयन्त्रकारी हाशिम एक इस्लामी कट्टरपंथी मौलवी था, जिसके भडकाऊ भाषण तमिलमें हुआ करते थे । अबूबकर उन्हीं भाषणोंको सुन रहा था और उसकी बुद्धिमें भी कोई आतंकी घटना पनप रही थी ।
२९ वर्षीय अबूबकर एक अन्य इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइकके वीडियो भी देख रहा था । उल्लेखनीय है कि जाकिर नाइक एक इस्लामिक ‘प्रवचनकर्ता’ है, जो अपने वीडियोके माध्यमसे जिहाद प्रसारित करता है और आतंकको बढावा देता है । भारतीय शासनने उसके ‘एनजीओ’पर प्रतिबन्ध लगा रखा है । ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’का संस्थापक जाकिर एक भगौडा है और भारतीय सुरक्षा विभाग उसे खोज रहे हैं । भारतमें ‘आईएस मॉड्यूल’के उजागर होनेके पश्चित सुरक्षा विभाग सतर्क हैं और श्री लंकामें हुए विस्फोटके पश्चात विशेष सतर्क हैं । इसी क्रममें बन्दी बनाए आतंकीसे ‘एनआईए’द्वारा निरन्तर पूछताछ की गई । रियास अबूबकरका नाम अबू दुजाना भी है ।
अबूबकर लम्बे समयसे एक अन्य भगौडा आतंकी अब्दुल राशिद अब्दुल्लासे भी सम्पर्कमें था । इसके लिए उनसे ऑनलाइन माध्यमोंका उपयोग किया था । वह अब्दुल राशिद अब्दुल्लाके ध्वनि सन्देश सुना करता था और उसे वह सन्देश विशेष रूपसे रूचिकर था, जिसमें राशिदने भारतमें आतंकी आक्रमण करने जैसी भडकाऊ बातें कही थीं ! इसको उसने सामाजिक प्रसार माध्यमपर भी प्रेषित किया था ! इसके अतिरिक्त अबूबकर वालापट्टनम ‘इस्लामिक स्टेट’ प्रकरणमें आरोपी अब्दुल खयूमसे भी ऑनलाइन बातें कर रहा था । आतंकरोधी विभागोंका मानना है कि खयूम अभी सीरियामें है ।
‘एनआईए’को सूचना मिली थी कि ४ लोगोंका एक समूह अब्दुल राशिद, अशफाक मजीद, और अब्दुल खयूमसे सम्पर्कमें था । ये तीनों अभी अफगानिस्तान या सीरियामें भाग खडे हुए हैं और वहीं रह रहे हैं । इस समाचारकी पुष्टिके पश्चात एनआईएने अन्वेषण अभियान आरम्भ किया । यह अभियान रविवार, २८ अप्रैलको कासरगोड और पलक्कडमें चलाए गए । जुलाई २०१६ में समाचार आए थे कि कासरगोडके १५ युवा आतंकी संगठनोंके झांसेमें आकर अफगानिस्तान या सीरिया चले गए हैं । अबूबकरको गुरुवार, २ अप्रैलको कोच्चिमें एक एनआईए न्यायालयमें प्रस्तुत किया जाएगा ।
“देवभूमि केरलको इस्लामिक राज्य बनानेवाले वामपन्थी शासन इसके लिए पूर्ण रूपसे उत्तरदायी है । केरलमें धर्मान्तरणको बढावा दिया गया और आज उसीका परिणाम है कि मुस्लिम वहां बहुसंख्यक हो चले हैं और जिसका परिणाम आतंकके केन्द्रके रूपमें सामने आया है और अब ये आतंकी श्री लंकामें भी फैलने लगे हैं । हिन्दू विरोधी वामपन्थी शासन यदि थोडा ध्यान इस विषयपर दे लेते तो आज परिस्थिति दूसरी होती; परन्तु आज स्थिति है कि आए दिन युवा आतंकी पकडे जा रहे हैं और उनके आश्रयपर ही आइएस भारतमें पांव पसारने लगा है ! आशा है कि शासनकर्ताओंको समय रहते आतंकका धर्म दिखेगा; अन्यथा परिस्थितियां नियन्त्रणके बाहर होंगीं ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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