अप्रैल ३०, २०१९
श्रीलंकामें ईस्टरके दिवस हुए भीषण आतंकी आक्रमणोंने समूचे देशको हिलाकर रख दिया था । विस्फोटके पश्चात श्रीलंका शासनने कई प्रकारके महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनमें सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर प्रतिबन्धसे लेकर अन्य कई महत्त्वपूर्ण निर्णय देशकी सुरक्षाको देखते हुए लिए गए । इस मध्य देशमें दो प्रमुख ‘केबल टीवी’ संचालकोंने विवादास्पद भारतीय इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइकके ‘पीस टीवी’को प्रतिबन्धित कर दिया हैं । उल्लेखनीय है कि भारत और बांग्लादेशने पहलेसे ही मलेशिया स्थित नाइकके ‘पीस टीवी’पर प्रतिबन्ध लगा रखा है । आरोप है कि इसपर प्रायः ‘आईएसआईएस’में सम्मिलित होनेके लिए युवाओंका भ्रमित किया जाता है ।
श्रीलंकाके दो सबसे मुख्य केबल संचालकों ‘डायलॉग’ और ‘एसएलटी’ने जाकिर नाइकके ‘पीस टीवी’को प्रसारित करना बंद कर दिया है । यद्यपि, इसपर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है । वहीं श्रीलंका शासनने भी विवादास्पद ‘पीस टीवी’पर अभी कोई प्रतिबन्ध नहीं लगाया है । उल्लेखनीय है कि देशकी सुरक्षाको देखते हुए श्रीलंकामें कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं और यह पग भी घातक ईस्टर बम विस्फोटोंके पश्चात लिया गया, जिसमें २५३ लोग मारे गए और ५०० अन्य चोटिल हो गए थे ।
सूचनाके अनुसार ‘पीस टीवी’को नाइकके मुम्बई स्थित ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’द्वारा २००६ में प्रकाशित किया गया था । २००९ में इसका एक उर्दू संस्करण लाया गया और इसके पश्चात २०११ में एक बंगला संस्करणको भी प्रकाशित किया गया । उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी, उर्दू और बंगाली भाषामें ये दुबईसे प्रसारित किया जाता है ।
उल्लेखनीय है कि नाइक भारतके ‘राष्ट्रीय जांच विभाग’की ऐच्छिक सूचिमें (वॉन्टेड लिस्टमें) सम्मिलित है । आरोप है कि नाइकने अपने घृणा भरे भाषणोंसे युवाओंको आतंकी गतिविधियोंको भडकानेका कार्य किया है । नाइककी राष्ट्रीय जांच विभागद्वारा (एनआईए) आतंक और ‘मनी लॉन्ड्रिंग’के आरोपोंके अन्तर्गत जांच की जा रही थी । उन्होंने जुलाई, २०१६ में भारत छोड दिया था । वहीं अब नाइकको मलेशियाई स्थायी निवासीका भी स्थान मिल गया है ।
“श्रीलंकाकी ओरसे यह सन्देश देरीसे आया है; परन्तु प्रशंसनीय है । वहांके शासनको अपनी चूकोंका भान हो रहा है और प्रत्येक इस्लामिक सामग्रीको प्रतिबन्धित कर रहा है । नाइक सदृश इस्लामिक उपदेश, जो जिहाद और आतंक प्रसारित करनेका कार्य करते हैं, उसे सभी राष्ट्रोंने मिलकर प्रतिबन्धित करना चाहिए और न करनेवालोंके विरुद्ध सामूहिक अभियान चलाना चाहिए और वैश्विक प्रतिबन्ध लगाने चाहिए ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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