जावेद अख्तरके बेतुके बोल, बुर्केपर प्रतिबन्ध लगानेसे पूर्व राजस्थानमें घूंघटपर प्रतिबन्ध लगाए केन्द्र शासन !!


मई २, २०१९

लेखक और गीतकार जावेद अख्तरने कहा है कि यदि भारतमें बुर्केपर प्रतिबन्ध लगता है तो केन्द्र शासन राजस्थानमें मतदानसे पूर्व घूंघटपर प्रतिबन्ध लगाए । उन्होंने कहा कि भाजपाने सम्भवतः विवशतामें साध्वी प्रज्ञाको भोपाल सीटपर अपना प्रत्याशी बनाया । अख्तरने भाजपाके राजमें लोकतन्त्रपर प्रश्न उठाए । उन्होंने कहा, “भाजपाकी यह विचारधारा है कि यदि तुम हमारे साथ नहीं, तो तुम देश विरोधी हो । अख्तर एक कार्यक्रमके प्रकरणमें गुरुवार, २ मईको भोपालमें थे ।

अख्तरने कहा, “२०१९ का मतदान देशके लिए महत्त्वपूर्ण है । ये मतदान एक दोराह है और जिस रास्तेपर देश जाएगा, वो अत्यधिक लम्बा होगा । ये मतदान निर्धारित करेगा कि देश किस राहपर जा रहा है । कई मोदी आएंगें और चले जाएंगें, देश है और रहेगा ।

उन्होंने कहा कि प्रज्ञा सिंहको भाजपाने प्रत्याशीके रूपमें उतारकर पराजय स्वीकार कर ली । साध्वीके श्रापसे एक देशभक्त हुतात्मा हो सकता है तो उन्हें ऐसा श्राप हाफिज सईद और दूसरे आतंकियोंको भी देना चाहिए । उल्लेखनीय है कि प्रज्ञाने मुम्बई आक्रमणमें हुतात्मा हेमंत करकरेको लेकर विवादित वक्तव्य दिया था । इसपर चुनाव अयोगने उनपर ७२ घंटोंका प्रतिबन्ध भी लगाया है ।   

जावेद अख्तरने कहा, “मैं राहुल गांधीको प्रधानमन्त्रीके रूपमें नहीं देखता और ‘चौकीदार चोर है’ जैसी भाषाका समर्थन नहीं करता हूं । प्रधानमन्त्री मोदी और पार्टीके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दोनों ही पसंद नहीं । इस बार भाजपा शासन नहीं आ रहा ।”

इसके साथ ही, जावेद अख्तरने कहा कि देशमें मतदान नहीं हो रहा है, जो किसी एक व्यक्तिके नामपर वोट मांगा जा रहा है । यहां सांसदोंके लिए चुनाव हो रहा है । लोग अपना सांसद चुनेंगें, न कि मोदी और राहुलको । इस बार मोदी प्रधानमन्त्री नहीं बनेंगें ।  

भारतमें श्रीलंकाकी भांति बुर्केपर प्रतिबन्धकी हो रही मांगको लेकर किए प्रश्नके उत्तरमें अख्तरने कहा कि श्रीलंकामें बुर्केपर प्रतिबन्ध नहीं लगा, वरन मुख ढंकनेपर प्रतिबन्ध लगा है ।

जावेदने कहा कि मैं न भाजपाका हूं, न कांग्रेसका । मेरे बाप-दादा कालापानीमें मरे हैं, मुझे कोई देशभक्ति नहीं समझाए । ऐसे कई मोदी आए और गए । हिन्दुस्तान है और सदैव रहेगा । उनके पास कुछ नही शेष था तो वो प्रज्ञाकेद्वारा खुलकर अपने वास्तविक रूपमें आ गए हैं । आप प्रज्ञाको चुनाव लडवाएंगें और ये आशा करेंगें कि लोग उसे वोट दें । क्या यही मिली थी भोपालके लिए ? प्रज्ञाको खडा करना यह बताता है कि आप भोपालके लोगोको कितना तुच्छ समझते हैं । रावण जब सीता हरणके लिए आया था तो वो साधु बनकर आया ।

 

“जावेद अख्तरको स्पष्ट करना चाहेंगें कि बुर्के और घूंघटमें अन्तर होता है; इसीलिए ही आजतक विश्वमें जो भी आतंकी घटनाएं हुई हैं, वे बुर्केके कारण हुई, न कि घूंघटके कारण ! घूंघट भारतीय संस्कृतिमें शालीनताको दिखाता है, जो नारियां स्वतः ही करती हैं और बुर्का विवशता व बन्धनको दिखाता है । बुर्केपर प्रतिबन्ध इसलिए भी आवश्यक है; क्योंकि आतंकी केवल एक विशेष समुदायसे आते हैं, वहां उन्हें बुर्केका ही ज्ञान होता है, घूंघटका नहीं ! इसके अतिरिक्त जब मतदानमें छद्म नागरिकता लिए कांग्रेस अध्यक्ष, दुष्कर्म, हत्याएं करनेवाले लोग भाग ले सकते हैं तो एक झूठे प्रकरणमें फंसाई गई, जिनपर अभी अभियोग चल ही रहा, सिद्ध भी नहीं हुआ है, वे क्यों नहीं ? क्या उन्होंनें भगवा पहना है, केवल इसलिए ? तो यह तो केवल भगवा विरोधी मानसिकताका ही परिचायक है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ



स्रोत : भास्कर

 



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