मई २, २०१९
कथित धर्मनिरपेक्ष राजनीति देशको किस ओर ले जा रही है कि श्रीरामके देशमें ही अब “जयश्रीराम” बोलनेपर प्रश्न किए जाने लगे हैं तथा ये प्रश्न भी उस इस्लामिक कट्टरपन्थी नेताद्वारा किए जा रहे हैं, जो अपनी प्रत्येक बातमें ‘इंशाअल्लाह’ कहता है । सनातनके आराध्य प्रभु श्रीरामको हिन्दुस्तानकी पहचान कहा जाता है, उस हिन्दुस्तानमें जब श्रीरामके उद्घोषपर आपत्ति प्रकट की जाए, जयश्रीराम बोलनेका विरोध किया जाए, तब प्रश्न उठता है कि अन्ततः ये कौनसी राजनीति है, जो ‘इंशाअल्लाह’ कहनेकी तो आज्ञा देती है; परन्तु जयश्रीरामकी नहीं !!
उल्लेखनीय है कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीद्वारा अयोध्या रैलीमें जयश्रीरामका उद्घोष करना हैदराबादके उन्मादी सांसद असदुद्दीनको रास नहीं आया तथा उसने इसके लिए प्रधानमन्त्रीके विरुद्घ चुनाव आयोगसे कार्यवाहीकी मांग की है । असदुद्दीन ओवैसीने कहा कि मैं चुनाव आयोगसे मांग करता हूं कि उनके वक्तव्यपर संज्ञान ले और यह चुनाव आचार संहिताका उल्लंघन है ! प्रधानमन्त्री मोदी मुस्लिमोंके विरुद्घ घृणा प्रसारित करनेका प्रयास कर रहे हैं । चुनाव आयोगको इसमें कार्यवाही करनी चाहिए ।
उल्लेखनीय है कि बुधवार, १ अप्रैलको प्रधानमन्त्री मोदीने अयोध्यामें एक रैलीको सम्बोधित किया । भाषणके आरम्भमें उन्होंने रैली स्थलको मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामकी भूमि बताया तो अपने भाषणका अन्त ‘जय श्रीराम’के उद्घोष लगवाकर किया । रैलीमें प्रधानमन्त्री मोदीने कहा था कि ये मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीरामकी भूमि है । ये स्वाभिमानकी भूमि है । देशमें यही स्वाभिमान गत ५ वर्षोंमें और बढा है । हम १३० कोटि लोगोंकी भुजाओंको साथ लेकर चले हैं । अब इन्ही भुजाओंके सामर्थ्यपर नूतन भारतका स्वप्न साकार करनेकी ओर बढ रहे हैं ।
“ओवैसी संविधानकी बाते करते हैं, पाकिस्तानको चेतावनी भी देते हैं, अर्थात कहनेको वे भारत-भारतकी रटका दिखावा अवश्य करते हैं; परन्तु भारतके प्राण श्रीरामके जयघोषसे वे उद्विग्न हो जाते हैं, संविधान संकटमें आ जाता है, इससे ही उनकी विषकारी मानसिकताका बोध होता है और इस संविधानने धर्मकी क्या स्थिति कर दी है कि मजारोंपर चादरें भेजो तो ठीक है; परन्तु कोई मन्दिर चला गया तो साम्प्रदायिक हो जाता है; इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु अब हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : सुदर्शन न्यूज
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