अत्याधुनिक प्रयोगशालामें तैयार होंगी नूतन आयुर्वेदिक औषधियां, सीएसआइआर और आयुष विभागने बढाएं पग !


मई ५, २०१९


वैज्ञानिक एवं औद्यौगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) अपनी तीन दशकाधिक (दर्जन) प्रयोगशालाओंकेद्वारा नूतन आयुर्वेदिक औषधियां खोजनेके एक बडे कार्यक्रमका शुभारम्भ करने जा रहा है । इसके लिए ‘सीएसआइआर’ने आयुष विभागके साथ सन्धि की है । आशा है कि अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और चोटीके वैज्ञानिकोंका साथ मिलनेके पश्चात असाध्य रोगोंके लिए प्रभावी आयुर्वेदिक औषधियोंका विकास हो सकेगा ।

आयुष मन्त्रालयके एक वरिष्ठ अधिकारीने कहा कि ‘सीएसआइआर’की प्रयोगशालाओंमें पहले भी आयुर्वेदपर कार्य हुए हैं और उसके परिणाम अत्यधिक उत्साहजनक रहे हैं । लखनऊ स्थित ‘सीएसआइआर’के अन्तर्गत आनेवाली ‘नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट’ने (एनबीआरआइ) ‘बीजीआर-३४’ नामक औषधि विकसित की है, जो मधुमेहकी चिकित्सामें अपनी पहचान बना चुकी है । उन्होंने कहा कि ‘सीएसआइआर’के वैज्ञानिकोंका साथ मिलनेके पश्चात आगे भी इसीप्रकारकी नूतन औषधियां विकसित करनेमें सफलता मिल सकती है ।

भारतके प्राचीन औषधीय सूत्रोंको विदेशमें एकाधिकार (पेटेंट) करनेसे रोकनेकी दिशामें भी ‘सीएसआइआर’ अत्यधिक कार्य कर चुका है । इसके अन्तर्गत ‘सीएसआइआर’ और आयुष विभागने आयुर्वेदपर परम्परागत ज्ञानके सम्बन्धमें एक डिजिटल पुस्तकालय (लाइब्रेरी) सज्ज किया था । इसे ‘ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी’ (टीकेडीएल) कहा जाता है । इस डिजिटल पुस्तकालयमें आयुर्वेदके सभी सूत्र (फार्मूले) और उससे जुडी जानकारियां कई विदेशी भाषाओंमें उपलब्ध हैं । इससे किसी भी देशमें आयुर्वेदके किसी सूत्रपर पेटेंट देनेसे पूर्व उसका सत्यापन (तस्दीक) करना सरल हो गया है । स्पष्ट है टीकेडीएलके अस्तित्वमें आनेके पश्चात आयुर्वेदके सूत्रोंपर (नुस्खोंपर) विदेशोंमें होनेवाले एकस्व अधिकारपर (पेटेंटपर) रोक लग गई है । वरिष्ठ अधिकारीने कहा कि टीकेडीएलके रूपमें ‘सीएसआइआर’के पास पहलेसे विद्यमान इन्हीं सूत्रोंकक (फार्मूलोंका) नीरिक्षणकर नूतन औषधियां विकसित की जाएंगीं ।

 

“स्वतन्त्रताके पश्चात भारतके महान विज्ञानकी कांग्रेसद्वारा विडम्बना की गई, जिसका परिणाम यह हुआ कि लोग ऐलोपैथिक औषधियोंकी ओर, बिना उसकी हानियोंको जाने, अन्धाधुन्ध भागने लगे हैं ।  जिसका परिणाम यह है कि देशके कई लाख कोटिकी हानि हो रही है और लोग भी पहलेसे अधिक रोगी हो रहे हैं । ऐसेमें आयुर्वेदके लिए मोदी शासनद्वारा उठाया यह पग प्रशंसनीय है; परन्तु आयुर्वेद विकसित करनेके अतिरिक्त उससे भी आवश्यक है, हमारी औषधियोंपर विदेशियोंद्वारा एकाधिकारको (पेटेंट) रोकना, जोकि मोदी शासनद्वारा ध्यानमें रखा गया, जोकि प्रशंसनीय है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 


स्रोत : जागरण

 



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