खूंटी सामूहिक दुष्कर्म प्रकरणमें फादर अल्फांसो दोषी सिद्ध, १५ मईको दिया जाएगा दण्ड !!


मई ७, २०१९


झारखण्डकी राजधानी रांचीसे सटे खूंटी जनपदमें एक अशासकीय (गैर सरकारी) संगठनकी (एनजीओ) पांच महिला कार्यकर्ताओंका अपहरणकर सामूहिक दुष्कर्मके प्रकरणके मुख्य आरोपी फादर अल्फांसोको दोषी सिद्ध दिया गया है । १५ मईको फादर अल्फांसोको दण्ड सुनाया जाएगा । न्यायालयकी ओरसे आरोप निर्धारित किए जानेके पश्चात फादर अल्फांसोको बन्दी बना लिया गया है ।

गत वर्ष खूंटी जनपदके कोचांग गांवमें सामूहिक दुष्कर्मकी इस घटनाने पूरे राज्यमें भय प्रसारित कर दिया था । गत वर्ष खूंटी जनपदमें मानव तस्करीके विरुद्घ जागरुकता फैलानेका काम करनेवाली ५ अव्यस्क लडकियोंको २१ जूनको कोचांग गांवमें बन्धक बनाकर उनके साथ दुष्कर्म किया गया था । घटनाके एक माह पश्चात पुलिस जुलाईमें दुष्कर्मके मुख्य आरोपीको पश्चिम सिंघभूम जनपदसे बन्दी बना सकी थी ।

पुलिस महानिरीक्षक नवीन कुमारने खूंटीमें बताया कि मुख्य आरोपी जुनस तुडूको बलराम समदके साथ चक्रधरपुर रेलवे स्टेशनसे बन्दी बनाया गया । जुनसने ‘पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया’के (पीएलएफआई) नक्सलियोंको सामूहिक दुष्कर्म करनेके लिए उकसाया था ।

सामूहिक दुष्कर्मके इस प्रकरणमें पुलिसने पीएलएफआई सदस्य और मुख्य आरोपी बाजी समद, रोमन कैथोलिक गिरिजाघरके पादरी अल्फांसो सहित २ अन्य आरोपियोंको पहले ही बन्दी बना लिया था । आरोपी बलराम समदने पूछताछमें माना था कि उसने और अन्य लोगोंने जुनस और बलरामके कहनेपर महिलाओंके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था ।

खूंटा-कोचांग सामूहिक दुष्कर्मकी घटनाके पश्चात कोचांग गांवमें लम्बे समयतक तनावकी स्थिति बनी हुई थी । ग्रामीणों और पुलिसके मध्य झडपकी कई घटनाएं हुई । झडपकी घटनाओंके कारण हुई भगदडमें कुछ ग्रामीणोंकी मृत्यु भी हो गई थी । ग्रामीणोंने बीजेपी सांसद करिया मुंडाके घरपर आक्रमणकर उनके तीन सुरक्षा गार्डोंको अपहरणकर लिया था ।

राष्ट्रीय महिला आयोगने इस घटनापर सख्ती दिखाई थी और अपना तीन सदस्यीय दल खूंटी भेजा था । इस दलने फादर अल्फांसोके आचरणपर संदेह प्रकट किया और व्यक्त किया है । प्रबन्धक नुक्कड नाटक दलकी इन पांच सदस्योंके अपहरणकी अधिकारियोंको जानकारी देनेमें कथित रूपसे विफल रहे ।

 

“मानव तस्करीका विरोध करनेवाली युवतियोंको बन्धक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म करनेवाला पादरी कठोर दण्डका पात्र है । झारखण्डमें गत वर्षोंमें ईसाईयोंद्वारा धर्मान्तरण किया गया है और मानव तस्करीमें भी ये आगे रहे हैं, जिसके कारण वहां अनेक अशासकीय संगठनोंको विरोध हेतु खडा होना पडा है । झारखण्ड शासनने ईसाईयोंका तुष्टिकरण करनेवाले अन्य शासकगणोंकी भांति पादरीको आश्रय न प्रदानकर प्रशंसनीय कार्य किया है । अब शासन पादरीको कठोर दण्ड दिलवाए और सुनिश्चित करें कि ऐसा दुस्साहस कोई पुनः न कर पाए ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : आजतक



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