मई ८, २०१९
राजस्थानमें कांग्रेस शासन बन चुका है और इसी कारण मीडियाको ऐसे जघन्य प्रकरण न ही दिखाई पड रहे हैं और न ही सुनाई दे रहे हैं !! राजस्थानके अलवरमें जहां मजहबी कट्टरपन्थी बडे स्तरपर अपराधोंमें सक्रिय है, वहांपर एक दलित महिलाके साथ ५ लोगोंने सामूहिक दुष्कर्म जैसा कुकृत्य किया है !!
अलवरमें एक महिला अपने पतिके साथ मोटरसाइकिलपर बैठकर अपने किसी कार्यसे जा रही थी, रास्तेमें ५ लोगोंने उन दोनोंको रोक लिया ! पतिको बुरे ढंगसे पीटा और दलित महिलाको पहले निर्वस्त्र किया और फिर बारी-बारीसे पांचोंने पतिके सामने ही सामूहिक दुष्कर्म किया और घटनाका पूरा विडियो भी बनाया !
पुलिसने इस प्रकरणमें ऐसा ढीला रवैया दिखाया, जैसे कुछ हुआ ही न हो । इस प्रकरणको राजस्थानके कांग्रेस शासनने पूर्ण रूपसे दबा दिया !
अभी लोकसभाके चुनाव चल रहे हैं और कांग्रेसको भय था कि यदि इस घटनाका समाचार राज्यमें फैला तो दलित वोटोंकी उसे हानि होगी; इसलिए कांग्रेसने प्रकरणको दबा दिया ।
राजस्थान में अपने पति के साथ जा रही एक दलित महिला का 5 नराधमो ने पूरे कपड़े उतार कर वीडियो बनाया और उसका बारी बारी से बलात्कार किया @ashokgehlot51 @cmor ने इस घटना को 10 दिन तक इसलिए दबाया ताकि चुनाव में नुकसान ना हो अब दलितों के ठेकेदार चुप क्यों हैं @Dr_Uditraj @kanhaiyakumar pic.twitter.com/z7orboqR9s
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) May 8, 2019
घटनाकी जानकारी सामाजिक प्रसार माध्यमपर (सोशल मीडियापर) कई दिनोंसे साझा की जा रही है; परन्तु फिर भी समाचार माध्यम मौन हैं । वहीं कथित दलित चिन्तक, दलित कार्यकर्ता, दलित संगठन भी ओझल हैं !
“धिक्कार है ऐसे पुलिस प्रशासन, समाचार जगत और निकृष्टतम राजनीतिको, जो ऐसे जघन्य कुकृत्यको वोटके चलते दबा देते हैं ! धिक्कार है उस लोकतन्त्रको व उस न्यायिक व्यवस्थाको, जो स्वतन्त्रताके ७० वर्षोंके पश्चात एक ऐसा विधान नहीं बना पाए, जिससे नारीको वासनापूर्ति नहीं वरन सम्मानकी दृष्टिसे देखा जाता ! न ही तथाकथित राष्ट्रनिष्ठ दल विधान बना पाए और न ही वह दल, जिसकी अध्यक्षा कई वर्षोंतक स्वयं एक महिला रह चुकी हैंं !! हम बडे-२ दावे करते हैं, अंतरिक्षतक हम पहुंच चुके हैं; परन्तु अपनी अकर्मण्यताके कारण संसद एक विधान नहीं बना पा रही है कि दुष्कर्मके स्पष्ट आरोपीको एक सप्ताहके भीतर सबके समक्ष मृत्यु दण्ड दिया जाएगा ! हमारे विकासका क्या लाभ ? सभी राजनेता संसदमें बैठकर सोचे और अपनी इस अकर्मण्यतापर विचार करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : डीबीएन
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