पाक कला (भाग-८)
प्राचीन कालसे ही लोहेके बर्तनमें भोजन बनानेकी पद्धति हमारे यहां प्रचलित है । यदि तरकारी(सब्जी) लोहेकी कढाईमें बनायी जाए तो उस व्यंजनमें भी लौह तत्त्व आ जाता है जो हमारे शरीरके लिए बहुत आवश्यक एवं उपयोगी होता है ।
लोहेके बर्तनमें कोई व्यंजन बनानेसे पूर्व उसे अच्छेसे मंज लेना चाहिए; क्योंकि अनेक बार जब हम लोहेके बर्तन धोकर रख देते हैं तो पानीका अंश रहनेसे उसमें जंगकी दाग आ जाती है जो शरीरके लिए अत्यन्त हानिकारक होता है; अतः लोहेके बर्तन यदि आप नित्य उपयोग करते हैं तो उसे राख या मिट्टीसे रगडकर धोएं एवं उसे पोछकर हल्कासा तेल लगाकर रख दें, इससे जंग भी नहीं लगेगा और वह नॉन-स्टिक समान हो जायेगा एवं बहुत ही कम तेलमें आपके व्यंजन बन सकते हैं ! वैसे ही लोहेके पात्रमें यदि तेल और मसाले लगे हो और आपको पुनः उस पात्रका उपयोग करना हो तो आप गेहूंके आटे या बेसनसे भी उस पात्रको धोकर तुरंत उपयोगमें ला सकते हैं ! विशेषकर हरि पत्तियोंवाली तरकारी एवं तलने हेतु लोहेकी कढाईका एवं रोटी बनाने हेतु लोहेके तवेका सम्पूर्ण भारतमें प्रचलन है; इसलिए ये सामान्य बातें आपको बता रही हूं ।
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