मई १५, २०१९
राजस्थानके शासकीय चिकित्सालयके प्रसव कक्षोंमें गायत्री मन्त्रका पाठ करनेका मुस्लिमोंने विरोध किया है । मुस्लिम कार्यकर्ताओंने आरोप लगाया है कि प्रसव पीडाको अल्प करनेके लिए गर्भवती महिलाओंको गायत्री मन्त्र सुनाया जा रहा है । प्रकरण सवाई माधोपुरके चिकित्सालयका है ।
सवाई माधोपुरके मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तेजराम मीणाने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’के साथ वार्तामें इस बातकी पुष्टि की है कि जिला चिकित्सालयमें गायत्री मन्त्रको बजाया जा रहा है । इसके अतिरिक्त जनपदके २० अन्य चिकित्सालयमें भी इसे आरम्भ किया जा रहा है । ऐसा इसलिए किया जा रहा है; क्योंकि गर्भवती महिलाओंको गायत्री मन्त्र सुनानेसे उनको अल्प पीडा होती है ।
वहीं मुख्य चिकित्सकीय अधिकारी (प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर) डॉक्टर ग्रोवरने इसपर कहा है कि ‘हम प्रसव कक्षोंमें भजन और गायत्री मन्त्रको गत एक वर्षसे बजा रहे हैं, इससे गर्भवती महिलाएं तनावमुक्त रहती हैं । वहीं उदयपुरके चिकित्सालयमें भी इसप्रकारका अभियान आरम्भ करनेकी तैयारी चल रही है । उदयपुर जनपदके स्वास्थ्य विभागके एक वरिष्ठ अधिकारीने जानकारी दी है कि शासनद्वारा संचालित चिकित्सीय महाविद्यालयके प्रसव कक्षोंमें भी गायत्री मन्त्रको बजानेपर विचार किया जा रहा है ।
वहीं विशेष सचिव (स्वास्थ्य) डॉ. समित शर्माने दावा किया कि राज्य शासनद्वारा गायत्री मन्त्र बजानेके निर्देश नहीं दिए गए हैं, वरन मानिसक तनावको दूर करनेके लिए ध्यानयुक्त ध्वनिको चलानेके लिए कहा गया है । हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं । यदि कुछ चिकित्सालय गायत्री मन्त्र चला रहे हैं तो उनके विरुद्घ परिवाद प्रविष्ट की जाएगी ।
मुस्लिम कार्यकर्ताओंको यह पसंद नहीं आ रहा है । इसका विरोध कर रहे मुस्लिम कार्यकर्ता अशफाक कायमखानीने कहा कि इस्लामके अनुसार, एक नवजात शिशुके कानोंमें पहली धुन अजानकी जानी चाहिए ।
वहीं (मातृ स्वास्थ्य), स्वास्थ्य विभागके परियोजना संचालक (प्रोजेक्ट डायरेक्टर) डॉक्टर तरुण चौधरीने कहा कि ‘हमने शोधके पश्चात इस धुनको (गायत्री मन्त्र) चुना था, जिसे राज्यके सभी जिला अधिकारियोंको भी सौंप दिया गया था । इसमें सुखदायक ध्वनियोंके अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, जो कि मां और गर्भमें पल रहे बच्चेके लिए अत्यन्त लाभकारी है । हम प्रसव कक्षोंमें एक शांतिका वातावारण बनाना चाहते हैं ।’
वहीं सीकर जिले से आई एक गर्भवती महिला अनामिका ने कहा कि गायत्री मंत्र का साउंड बेहद ही सुखदायक है जिससे मेरा तनाव काफी हद तक दूर हुआ।”
“भारत एक हिन्दू बहुल राष्ट्र है और सनातनियोंने अपने लिए और अपनी बुद्धिके प्रत्येक द्वारको सदैव ही खुला रखा है । जो मानवताके लिए कल्याणकारी हो, उसे सदैव अपनाया है, इसलिए धर्मान्धोंकी भांति कभी भी इस पागलपनमें नहीं पडे कि शिशुके कानमें अजान ही पडे । वैसे तो गायित्री मन्त्र एक महामन्त्र है और शास्त्रोंने इसके प्रयोगके लिए कुछ विशेष नियम बताए हैं, जिनका पालन किए बिना इसका जप नहीं करना चाहिए, उसके स्थानपर अन्य देवोंके जप आदि चलाए जा सकते हैं; परन्तु मुसलमानोंका यह कहना कि यह हमारे इस्लामके विरुद्घ है, यह हास्यास्पद है । यदि इतनी ही समस्या है तो कोई अन्य चिकित्सालयमें जाया जा सकता है अथवा शरियतके ठेकेदारोंको कहकर इस्लामिक चिकित्सालय खुलवा सकते हैं !! हिन्दू चलचित्रोंमें इस्लामिक गीत सुनते हैं, पांच समय ध्वनिप्रसारक यन्त्रोंपर अजान चलती है, तो उसपर कभी समस्या प्रकट नहीं की तो मुसलमानोंको क्यों हो रही है ? यह तो धर्मनिरपेक्षता नहीं कहलाती, वरन धर्मान्धता कहलाती है, जो इनकी जिहादी मानसिकताको दिखाती है !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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