आए दिन देशके भिन्न राज्योंमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल इत्यादि बलाढ्य राष्ट्रवादी संगठनके कार्यकर्ताओंकी हत्या, एक हिन्दुत्ववादी कही जानेवाली केंद्र शासनके कार्यकालमें होना और वह भी तब जब स्वयं इस देशके प्रधानमन्त्री ऐसे ही एक दलके प्रचारक और सदस्य रह चुके हैं, यह स्पष्ट दर्शाता है कि इस देशकी और हिन्दुओंकी स्थिति दिन-प्रति-दिन विकट होती जा रही है एवं निधर्मी लोकतन्त्र हिन्दुत्ववादियोंको सुरक्षा देनेमें असक्षम रही है, चाहे किसी भी राजनितिक दलका शासन हो एवं अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना ही इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु एकमात्र पर्याय है ।
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