नामजप करते समय सात्त्विक उदबत्ती (सनातन संस्थाकी उदबत्तीका उपयोग कर सकते हैं) लगानेसे एवं सात्त्विक वस्त्र धारण कर बैठनेसे भी लाभ होता है | वस्तुत: कर्मकाण्डकी साधना हेतु एक पृथक वस्त्र होता है, उसीप्रकार आरम्भिक अवस्थामें पुरुषस सूती या रेशमी धोती एवं स्त्रियां साडी डाले तो उसका भी लाभ मिलता है साथ ही तिलक लगानेसे मनकी एकाग्रतामें वृद्धि होती है | प्राथमिक स्तरकी खेचरी मुद्रा(मात्र जिह्वाको उल्टाकर यथाशक्ति तालूमें लगाना) करनेसे भी नामजपमें मन शीघ्र एकाग्र होता है | यदि नामजपसे पूर्व नमक पानीसे स्नान या नमक पानी युक्त जलमें पंद्रह मिनिट हेतु पांव डुबोया जाए तो भी मन एवं बुद्धिका आवरण नष्ट होता है एवं नामजपमें एकाग्रता बढती है |नमक पानीसे स्नानकी विधि : स्नान करते समय थोडा सा (एक चम्मच) मोटा एवं ढेलेवाला नमक (प्राकृतिक सेंधा नमक, रॉक साल्ट) एवं गौ मूत्र डाल कर दस लोटे पानीसे प्रथम स्नान करें तत्पश्चात नित्य सामान स्नान करें | नाम पानीमें पांव डुबोनेकी विधि : आधे बाल्टी शीतल जलमें एक चम्मच गौ मूत्र एवं एक चम्मच सेंधा नमक डालकर उसमें प्रन्द्रह मिनिट पांव डालें और उसके पश्चात स्वच्छ जलसे पांव धो लें एवं जलको जहां लंघन न पडे ऐसे स्थानपर फेंक दें |वर्तमान कालमें सभी साधकोंको कष्ट है अतः ऊपर बताये दोनों प्रक्रिया नियमित करनेका प्रयास करना चाहिए इससे आभा मण्डल स्वच्छ होता है और मन सकारात्मक एवं शान्त रहता है !
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