नामजपकी परिणामकारकताको बढाने हेतु आरम्भिक अवस्थाके साधकोंने प्रथम भाव जागृति एवं उसके पश्चात भाव वृद्धि हेतु प्रार्थना करनी चाहिए ! भाव वृद्धि होनेसे जैस-जैसे शरणागति बढती है वैसे-वैसे नामजपकी गुणवत्ता बढती जाती है एवं नामजप वैखरीसे मध्यमा तदोपरान्त पश्यन्तिकी ओर बढती है ! कलसे हम ऐसे ही कुछ प्रार्थानाओंके विषयमें जानेंगे |
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