केरलके कोट्टायम जनपदमें पुलिसने एक मदरसा अध्यापकको बच्चोंके साथ दुष्कर्मके आरोपमें बन्दी बनाया है । ६३ वर्षके आरोपी युसूफको मदरसा चलानेवाली मस्जिद समितिकी परिवादके (शिकायतके) पश्चात शनिवार, १ जूनको बन्दी बनाया गया । पुलिसके अनुसार, यूसुफ एक अपराधी था और उसने एक दशकाधिकसे अधिक बच्चोंका यौन शोषण किया । पुलिसने कहा कि माता-पिताकी परिवाद प्रविष्ट करानेमें विफल रहनेके कारण यूसुफको पहले बन्दी नहीं बनाया गया था ।
गत सप्ताह थालायोलापारांबू मदरसेमें युसूफने एक बच्चेको कुरान पढानेके बहाने बुलाया, जिसके पश्चात बच्चा जब घर गया तो भयभीत बच्चेने दुष्कर्मकी पूरी कहानी अपने माता-पिताको बता डाली, जिसके पश्चात माता-पिताने इसकी परिवाद मदरसा चलानेवाली मस्जिद समितिको की । ज्ञात हुआ कि २ वर्ष पूर्व भी इस मदरसेमें युसूफपर कई बच्चोंने विरोध प्रकट किया था; परन्तु तब मदरसेने कोई कार्यवाही नहीं की थी । वर्तमान प्रकरण सामने आनेके पश्चात मस्जिद समितिने युसूफको पहले मदरसेसे निकाल दिया है ।
समाचारके अनुसार, बन्दी बनानेके पश्चात युसुफने २५ वर्षकी आयुसे बच्चोंके साथ दुष्कर्म करनेकी बात स्वीकार कर ली और यह भी बताया कि जब वो बच्चा था तब वो स्वयं भी यौन शोषणका लक्ष्य बना था । मौलानाने कहा कि उसने एक व्यक्तिसे बदला लेनेके लिए उसकी पुत्रीसे दुष्कर्म किया; क्योंकि कभी उसने भी उसका (यूसुफका) यौन उत्पीडन किया था । यूसुफको यह विश्वास था कि वो कभी पकडा नहीं जाएगा; क्योंकि बच्चोंको सम्भवतः यौन शोषण और वैधानिक कार्यवाहीका कोई ज्ञान नहीं हो ।
मदरसोंसे समूचे देशसे मौलवियोंद्वारा दुष्कर्मके समाचार आ रहे हैं; परन्तु शासन कोई कार्यवाही नहीं करता है और मदरसोंपर प्रतिबन्ध नहीं लगाता है । शासन यह ध्यान रखें कि इससे केवल मौलानाओंका ही तुष्टिकरण हो रहा है और मुसलमानके बालकोंकी समूचि पीढीको अन्धेरेमें धकेल रहा है और वे देशको अन्धकारमें धकेलते हैं ! अतः शासन इस प्रकरणमें कार्यवाहीकर मदरसोंसे बच्चोंको निकालकर उन्हें मुख्यधाराके विद्यालयोंमें डालें । – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
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