चुनावसे पूर्व प्रत्याशीगण एक दूसरेपर आरोप-प्रत्यारोप कर सम्पूर्ण वातावरणको दूषित कर देते हैं । जिन्हें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा क्या होती है ?, अपने प्रतिद्वंद्वीके प्रति सम्मानका भाव किसे कहते हैं ?, यह भी ज्ञात नहीं, वे राष्ट्रका कल्याण कैसे कर सकते हैं ? ऐसे निकृष्ट लोकतन्त्रका राष्ट्रके उत्थान हेतु शीघ्र परित्याग कर, हिन्दू राष्ट्र रूपी आदर्श राष्ट्रीय प्रणालीको स्थापित करना अति आवश्यक है ।
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