श्रीगुरु उवाच


वैद्यकीय पदवीधारक न होनेनेपर रोगियोंपर उपचारकी अनुमति नहीं दी जाती । उसीप्रकार राष्ट्र तथा धर्म विषयी जिनमें प्रेम नहीं तथा उस सम्बन्धमें जो कुछ करते नहीं, ऐसे शासनकर्ता चुनकर देनेका अधिकार जनताको देनेसे क्या होता है ? यह भारतकी आजकी दुःस्थितिसे ज्ञात होता है । –  परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : https://sanatanprabhat.org/



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