श्रीगुरु उवाच


विचारस्वातंत्र्य अर्थात दूसरेको व्यथित कर अथवा धर्मविरुद्ध बोलनेका स्वातंत्र्य नहीं है, इतना भी स्वतंत्रता पश्चात ७१ वर्ष भारतपर शासन करनेवाले एक भी राजकीय पक्षके ध्यानमें नहीं आया । –  परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था 

साभार : https://sanatanprabhat.org/



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