मुख्यमन्त्री ममताके अहंका परिणाम, बंगालमें ७०० चिकित्सकोंको त्यागपत्र, ‘एम्स’ने दिया ममताको ४८ घंटेका समय !!


जून १५, २०१९

बंगालके शासकीय चिकित्सालयके ७०० से अधिक चिकित्सकोंने अपने पदसे त्यागपत्र दे दिया है । ऐसा उन्होंने विरोध कर रहे कनिष्ठ चिकित्सकोंके प्रति एकजुटता दिखानेके लिए किया । कोलकाता स्थित नील रतन शासकीय चिकित्सालयमें सोमवार, १० जूनको दो कनिष्ठ चिकित्सकोंके साथ हुई मारपीटके पश्चात आरम्भ हुआ विरोध प्रदर्शन निरन्तर तीव्र होता जा रहा है । इस विरोध प्रदर्शनमें देहली, मुंबई, कर्नाटक सहित कई बडे नगरोंके चिकित्सकोंका साथ मिला । इससे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड गई है । ममताकी जिदके कारण लोगोंके प्राणोंपर बन आई है; परन्तु ममताकी असंवेदनशीलता बनी हुई है और वो अपनी जिदपर अडी हुई हैं ।

चिकित्सकोंने मांग की है कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए और दोषियोंके विरुद्घ कडी कार्यवाही हो, साथ ही ममता क्षमा मांगे । यही नहीं, देहली स्थित एम्सके चिकित्सकोंके संगठनने भी ममता शासनको दो दिनका समय दिया है । उन्होंने कहा है कि यदि दो दिनोंमें बंगाल शासनने मांगें स्वीकार नहीं की, तो एम्समें भी अनिश्चितकालीन हडताल की जाएगी ।

गुरुवार, १३ जूनको मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी एसएसकेएम चिकित्सालय पहुंची और उन्होंने विरोध प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकोंको ४ घंटेमें कामपर वापस जानेकी चेतावनी दी और कहा कि यदि वो ४ घंटेमें काम पर नहीं लौटते हैं तो उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी । इसने चिकित्सकोंको भडकानेका कार्य किया । इसीका परिणाम है कि एक ही दिनमें ७०० से अधिक चिकित्सकोंने त्यागपत्र दे दिया ।

“आक्रमण करनेके स्थानपर जिहादियोंकी सुरक्षा कर रही ममता बैनर्जी अब शासनकी योग्यता खो चुकी हैं । केन्द्र इस बिगडती हुई स्थितिको सम्भाले और बंगालमें राष्ट्रपति शासन लगाकर परिस्थितियोंको नियन्त्रण करें; क्योंकि इस आपदाकी स्थितिमें भी ममता वोटबैंककी सोच रही हैं तो ऐसेमें केन्द्रको ही आगे आना होगा ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : ऑप इण्डिया



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